कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के एर्दोगन का UN में बयान
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में कश्मीर मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को सकारात्मक कदम बताया और कश्मीर विवाद को बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर हल करने का आह्वान किया। एर्दोगन ने इसे कश्मीर के निवासियों के सर्वोत्तम हित में बताया।
पिछले साल चुप्पी के बाद बदला रुख
यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने कश्मीर मुद्दा उठाया है। हालांकि, पिछले साल उन्होंने UN मंच पर इस विषय पर चुप्पी साधी थी। माना जाता है कि तुर्की ने ब्रिक्स समूह में शामिल होने की रणनीति के तहत ऐसा किया था, क्योंकि भारत ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। अब जब ब्रिक्स में शामिल होने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो तुर्की अपने पुराने रुख पर लौट आया है।
भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
भारत ने तुर्की के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर एर्दोगन की टिप्पणियों को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने तुर्की को पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने की नीति पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
एर्दोगन के इस बयान ने एक बार फिर तुर्की और भारत के बीच राजनीतिक तनाव को उजागर किया है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन भारत ने अपने रुख को स्पष्ट और दृढ़ता से प्रस्तुत किया है।