लंदन में महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ की गई छेड़छाड़
लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटना सामने आई है। उपद्रवियों ने प्रतिमा पर पेंट से गांधी, मोदी और हिंदुस्तानियों को आतंकी लिखा, जिससे भारतीय समुदाय में रोष फैल गया। भारतीय उच्चायोग ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
भारतीय उच्चायोग ने जताई चिंता
भारतीय उच्चायोग ने इस घटना को महात्मा गांधी के अहिंसा और शांतिपूर्ण विचारों पर हमला बताया। उच्चायोग ने स्थानीय अधिकारियों को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद ब्रिटिश अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उच्चायोग ने बयान में कहा कि यह शर्मनाक घटना अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस से तीन दिन पहले हुई है, और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रतिमा की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
महात्मा गांधी की प्रतिमा: ऐतिहासिक महत्व
महात्मा गांधी की यह कांस्य प्रतिमा 1968 में प्रसिद्ध पोलिश-भारतीय प्रतिमाकार फ्रेडा ब्रिलियंट द्वारा बनाई गई थी। इसे यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के पास टैविस्टॉक स्क्वायर के उद्यान में स्थापित किया गया। गांधीजी 1888-1891 के दौरान UCL में कानून के छात्र थे। यह प्रतिमा उनके लंदन में बिताए समय और उनकी वैश्विक विरासत को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाई गई।
प्रतिमा में गांधीजी को उनकी पारंपरिक धोती पहने हुए दिखाया गया है, जो उनकी सादगी और अहिंसा के दर्शन को दर्शाता है। हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर इस प्रतिमा के पास समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिनमें फूल चढ़ाना, भजन गायन और स्मृति सभाएं शामिल होती हैं।
दुनियाभर में गांधी की प्रतिमाएं निशाना बनीं
यह पहली बार नहीं है जब गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाया गया है। दुनियाभर में उनकी प्रतिमाओं पर तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुई हैं। 2003 और 2015 में साउथ अफ्रीका में प्रदर्शनकारियों ने गांधी को नस्लीय बताते हुए उनकी प्रतिमा हटाने की मांग की थी। 2020 में नीदरलैंड्स में प्रदर्शनकारियों ने गांधी प्रतिमा पर लाल पेंट से रेसिस्ट यानी नस्लवादी लिखा। 2021 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गांधी प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई थी।
ब्रिटेन में भारत विरोधी घटनाएं
ब्रिटेन में पहले भी भारत विरोधी घटनाएं हो चुकी हैं। मार्च 2023 में खालिस्तान समर्थकों ने भारतीय हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन करते हुए तिरंगा उतार दिया था। इसी साल विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कार को खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। भारत ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है और ब्रिटिश प्रशासन से कूटनीतिक कर्तव्यों को निभाने की उम्मीद जताई है।
निष्कर्ष
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर हमला न केवल भारतीय समुदाय बल्कि गांधी के विचारों और उनकी वैश्विक विरासत पर भी चोट है। भारतीय उच्चायोग और स्थानीय प्रशासन इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं। उम्मीद है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी और प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।