माघ मेला विवाद : प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मांगेगा माफी

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माघ मेला विवाद :  प्रयागराज प्रशासन   शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद से मांगेगा  माफी

माघ मेला विवाद: प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगेगा

प्रयागराज प्रशासन आखिरकार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से माफी मांगने को तैयार हो गया है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने इसकी पुष्टि की है। यह घटनाक्रम माघ मेले में प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच हुए टकराव के बाद सामने आया है, जिसके चलते शंकराचार्य अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले गए थे। अब लखनऊ के दो बड़े अधिकारी उन्हें वापस लाकर माघी पूर्णिमा पर स-सम्मान संगम स्नान कराएंगे। शंकराचार्य ने इसके लिए दो शर्तें रखी हैं, जिनकी घोषणा वह 30 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में करेंगे।

विवाद की जड़ और शंकराचार्य का मेला छोड़ना

प्रयागराज प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह टकराव 11 दिन तक चला। मौनी अमावस्या पर प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच हुई झड़प के बाद यह विवाद बढ़ा था, जब शिष्यों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया था और वे संगम स्नान नहीं कर पाए थे। 28 जनवरी की सुबह शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ दिया, जिससे प्रशासन चौंका गया, क्योंकि वे माघ पूर्णिमा के बाद उनके जाने की उम्मीद कर रहे थे।

प्रशासन की बैकफुट पर आने की कहानी

शंकराचार्य के अचानक मेला छोड़ने के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया। 27 जनवरी की शाम को विवाद सुलझाने के लिए एक गुप्त बैठक हुई, जिसमें माघ मेले के अधिकारी ऋषि राज, अपर मेला अधिकारी दयानंद प्रसाद और अन्य अफसर शामिल थे। शंकराचार्य की ओर से मनकामेश्वर मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक में प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार की और घटना के लिए खेद प्रकट किया, लेकिन सार्वजनिक माफी या लिखित आश्वासन देने से इनकार कर दिया। महंत श्रीधरानंद ने प्रशासन से लिखित माफी मांगने पर जोर दिया, जिस पर सहमति नहीं बन पाई।

शंकराचार्य का प्रस्ताव ठुकराना

वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ के अधिकारियों ने शंकराचार्य से संपर्क साधा और उन्हें माघी पूर्णिमा पर स-सम्मान संगम स्नान कराने का प्रस्ताव दिया। प्रशासन ने उन्हें पालकी से संगम ले जाने और उन पर फूल बरसाने का आश्वासन दिया। हालांकि, शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि जब मन में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता। उन्होंने कहा कि यदि वह प्रशासन की बातें स्वीकार कर लेते, तो उनके बटुकों और शिष्यों के साथ हुई अभद्रता और मारपीट की घटना का क्या होता, इसलिए उनका मेला क्षेत्र से जाना ही उचित था। उन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान करने वालों को औकात दिखाने की बात भी कही थी।

आगे की रणनीति

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कंप्यूटर बाबा भी मौनी अमावस्या से उनके साथ हैं। वाराणसी में शंकराचार्य के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय कर ली गई है। शंकराचार्य 30 जनवरी को सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी रणनीति का ऐलान करेंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

Gulzar Ahmad