मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के लिए लंबा इंतजार
मध्य प्रदेश का वित्त विभाग अपने घोषित प्लान के अनुसार सातवें वेतनमान पर 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता चालू वित्त वर्ष में नहीं दे पाएगा। इसके चलते प्रदेश के लगभग 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ते के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
वित्त विभाग का मूल प्लान
वित्त विभाग ने योजना बनाई थी कि सातवां वेतनमान पाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 तक 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। इसके बाद वर्ष 2026-27 में इसे 74 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 84 प्रतिशत और वर्ष 2028-29 में 94 प्रतिशत तक पहुंचाना था। यह प्लान इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वर्ष 2028-29 में ही नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
मौजूदा स्थिति और प्लान में अंतर
वर्तमान में, केंद्र सरकार के निर्णय के 8 माह बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारियों को महंगाई भत्ते की राशि दी गई है, जो 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी ही हुई है। सरकार ने हाल ही में 3 प्रतिशत बढ़ा हुआ भत्ता अप्रैल के वेतन से देने का फैसला किया है। इस कारण, कर्मचारी अभी भी सरकार के मूल प्लान से 6 प्रतिशत पीछे हैं। मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है कि 2025-26 में 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में यह कुल 58 प्रतिशत ही है।
5वें और 6वें वेतनमान वालों के लिए योजना
वित्त विभाग ने 6 माह पहले यह भी बताया था कि 6वें या 5वें वेतनमान पाने वाले कर्मचारियों को भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% महंगाई भत्ता दिया जाता है, जो हालिया घोषणा के बाद 255 प्रतिशत हो जाएगा। आगामी वर्षों में इसे 2026-27 में 265 प्रतिशत, 2027-28 में 280 प्रतिशत और 2028-29 में 295 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। इसी तरह, पांचवें वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों को वर्तमान में 315% के मान से महंगाई भत्ता दिया जाना है, जिसे 2026-27 में 325 प्रतिशत, 2027-28 में 335 प्रतिशत और 2028-29 में 345 प्रतिशत तक पहुंचाने का प्लान है।
हालिया घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने होली से पहले राज्य कर्मचारियों को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने की घोषणा की है। इस घोषणा से प्रदेश के 7.50 लाख कर्मचारी-अधिकारी और करीब 4.50 लाख पेंशनर्स लाभान्वित होंगे।
Arvind Vishwakarma