मध्य प्रदेश: 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त, भाजपा का 'मिशन निकाय'
मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद रविवार को 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षदों) के नामों की घोषणा कर दी गई है। इस नियुक्ति में 123 नगर परिषदों में 4-4 एल्डरमैन जबकि 46 नगर पालिकाओं में 6-6 एल्डरमैन बनाए गए हैं। भाजपा इस कदम को आगामी निकाय चुनावों से पहले अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के एक उपकरण के रूप में देख रही है।
एल्डरमैन की भूमिका और कार्यकाल
नियुक्त एल्डरमैन परिषद की बैठकों और चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं, लेकिन इनके पास वोट देने का अधिकार नहीं होता है। इन्हें सरल शब्दों में परिषद के 'मार्गदर्शक' की भूमिका में देखा जाता है, न कि 'निर्णायक' की। एल्डरमैन का कार्यकाल वर्तमान परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाएगा। इनकी नियुक्ति का मुख्य आधार प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका अधिनियम की जानकारी होता है। हालांकि, सागर, बुंदेलखंड और चंबल के निकायों में सहमति न बन पाने के कारण फिलहाल एल्डरमैन की लिस्ट रोक दी गई है।
भाजपा की रणनीति
भाजपा ने एल्डरमैन की नियुक्तियों को केवल पद भरने के तौर पर नहीं देखा है, बल्कि इसे निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का एक प्रभावी तरीका माना है। इस रणनीति के तहत, उन पुराने और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें नगर प्रशासन का गहरा ज्ञान है। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करना भी है। इन नियुक्तियों के माध्यम से उन जिला स्तरीय सक्रिय नेताओं को समायोजित किया गया है, जो लंबे समय से किसी पद की प्रतीक्षा कर रहे थे। भाजपा का मानना है कि इन अनुभवी एल्डरमैन के जरिए परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।
Vivek Singh