मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक ने बनाए 106 प्रतिनिधि: स्कूल से अस्पताल तक नियुक्ति, विवाद शुरू

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मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक ने बनाए 106 प्रतिनिधि: स्कूल से अस्पताल तक नियुक्ति, विवाद शुरू

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक ने 106 प्रतिनिधि नियुक्त कर तोड़ा रिकॉर्ड, कांग्रेस ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रतिनिधि नियुक्त करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रमेश खटीक ने इस कड़ी में एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 106 विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। ये नियुक्तियां जिला मुख्यालय के लगभग सभी विभागों के साथ-साथ उनके विधानसभा क्षेत्र के स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, निजी विश्वविद्यालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पशु अस्पतालों तक में की गई हैं।

कांग्रेस ने बताया 'प्रतिनिधि बनाने की होड़'

इस मामले पर कांग्रेस संचार विभाग के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब जनप्रतिनिधियों के काम से ज्यादा प्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है। गुप्ता ने याद दिलाया कि इससे पहले भी भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने थानों में विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किए थे, जिस पर काफी बवाल हुआ था और बाद में नियुक्तियाँ रद्द करनी पड़ी थीं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री वीरेन्द्र खटीक का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 125 से अधिक सांसद प्रतिनिधि बनाए थे, जिन पर भाजपा के ही नेताओं ने विरोध जताया था और अंततः वे नियुक्तियां भी रद्द कर दी गई थीं। भूपेन्द्र गुप्ता ने तंज कसते हुए कहा कि करैरा विधायक ने तो इतने प्रतिनिधि बना दिए हैं कि हर दूसरी गली में एक विधायक प्रतिनिधि मिल जाएगा।

विधायक ने दी नियुक्तियों की वजह

अपनी नियुक्तियों पर करैरा विधायक रमेश खटीक ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान और डीपीआईपी जैसी जगहों पर यदि वे स्वयं नहीं जा पाते हैं, तो कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें जानकारी मिल सकेगी। विधायक के अनुसार, बैठकों में उपस्थिति सुनिश्चित करने और क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ये प्रतिनिधि बनाए गए हैं।

कहां-कहां हुई ये नियुक्तियां?

विधायक रमेश खटीक द्वारा नियुक्त किए गए 106 प्रतिनिधियों में से 18 शिक्षा क्षेत्र (स्कूल-कॉलेज, यूनिवर्सिटी) में, 6 प्रशासनिक एवं विभागीय कार्यों में, 15 अलग-अलग अस्पतालों में (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुर्वेदिक एवं पशु अस्पताल), 19 कृषि, मंडी एवं सहकारिता विभाग में, 5 छात्रावासों में, 14 आजीविका मिशन एवं ग्रामीण विकास योजनाओं में, 12 जल संसाधन, विद्युत एवं तकनीकी विभाग में, और 15 अन्य महत्वपूर्ण विभागों (राजस्व, खाद्य, खेल आदि) में शामिल हैं।

नियमों के दायरे से बाहर लगती हैं ये नियुक्तियां

मध्य प्रदेश में आधिकारिक तौर पर एक विधायक को कुछ ही जगहों पर प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होता है, जैसे जनपद पंचायत, नगर पालिका/नगर परिषद (प्रत्येक में 1), जिला योजना समिति (विधायक की अनुपस्थिति में), रोगी कल्याण समिति (RKS) और मंडी समिति (प्रत्येक में 1)। विशेषज्ञ बताते हैं कि 106 प्रतिनिधियों की यह व्यापक नियुक्ति, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और निजी संस्थानों को भी शामिल किया गया है, इन आधिकारिक नियमों के दायरे से काफी बाहर प्रतीत होती है और पहले के ऐसे विवादों को दोहराती है जहां व्यापक नियुक्तियों को अंततः रद्द करना पड़ा था।

Navjeet Kaur