मध्य प्रदेश में कांग्रेस का 'क्रूर विश्वासघात' आंदोलन: किसान मुद्दों पर सरकार को घेरेगी

· 1 min read
मध्य प्रदेश  में  कांग्रेस  का 'क्रूर विश्वासघात' आंदोलन:  किसान  मुद्दों पर  सरकार को घेरेगी

मध्य प्रदेश में कांग्रेस का 'क्रूर विश्वासघात' आंदोलन: किसान मुद्दों पर घेरेगी सरकार

मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने 9 अप्रैल को प्रदेश के सभी जिलों में 'क्रूर विश्वासघात' आंदोलन की घोषणा की है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों की बदहाली और राज्य सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करेंगे। प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर किसानों को बिचौलियों के हवाले करने का आरोप लगाया है।

सरकार पर गेहूं खरीद के वादे से मुकरने का आरोप

विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का वादा किया था। लेकिन, सत्ता में आने के बाद सरकार ने मात्र 40 रुपये का बोनस देकर किसानों के साथ 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा व्यवहार किया है। कांग्रेस के अनुसार, यह किसानों के साथ सीधा 'क्रूर विश्वासघात' है। पड़ोसी राज्य राजस्थान में जहां 150 रुपये बोनस दिया जा रहा है, वहीं मध्य प्रदेश का किसान अपने हक के लिए भटक रहा है। सरकार ने खरीदी की तारीखों को तीन बार आगे बढ़ाया है, जिससे समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मंडियों में अव्यवस्था, खरीदी में देरी और बारदाने की कमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है।

प्राकृतिक आपदा और बारदाने की कमी का बहाना

कांग्रेस ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं, जैसे ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। 1 अप्रैल को हुई भीषण ओलावृष्टि से सीहोर, विदिशा सहित 17 जिलों में फसलें बर्बाद हो गईं और मंडियों में हजारों क्विंटल गेहूं खुले में भीग गया। सरकार जूट बैग (बारदाने) की कमी के लिए ईरान-इजरायल युद्ध का बहाना बना रही है, जबकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जूट उत्पादक है। 10 करोड़ बारदानों की जरूरत के मुकाबले सरकार ने समय पर केवल 2.60 करोड़ के लिए आवेदन किया। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने 160 लाख टन पंजीकरण के मुकाबले केवल 78 लाख टन खरीदी की सीमा तय कर किसानों की कमर तोड़ दी है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में 10 अप्रैल और अन्य संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी का निर्णय केवल इसलिए लिया गया है ताकि किसान घबराकर अपनी फसल कम दामों में व्यापारियों को बेच दें।

किसानों की आत्महत्याएं और कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों के लिए निर्धारित 50% राशि भी सरकार ने खर्च नहीं की है। प्रदेश में कर्ज के बोझ तले दबे 1,229 किसानों ने पिछले दो सालों में आत्महत्या कर ली है। कांग्रेस पार्टी किसानों की इस पीड़ा को समझती है और उनके हक की लड़ाई लड़ेगी। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मंडियों में बारदाने के पुख्ता इंतजाम और तुरंत खरीदी शुरू नहीं की गई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेशभर में उग्र प्रदर्शन करेंगे और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल निवास के सामने उपवास पर बैठेंगे। इंदौर जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने भी बारदान की कमी को सरकार का बहाना बताते हुए कहा कि इससे किसानों को मजबूर होकर अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।

Arvind Vishwakarma