मध्य प्रदेश में मोहन राज में बिजली की किल्लत 97% घटी: राज्य 'जीरो पावर कट' की ओर

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मध्य प्रदेश में मोहन राज में बिजली की किल्लत 97% घटी: राज्य 'जीरो पावर कट' की ओर

मध्य प्रदेश में बिजली की किल्लत में 97% की भारी गिरावट, राज्य 'जीरो पावर कट' की ओर

मध्य प्रदेश में बिजली की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में राज्य 'जीरो पावर कट' की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल की तुलना में अब राज्य में बिजली की कमी लगभग समाप्त हो गई है। यह आंकड़े भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के केरल से सांसद एए रहीम द्वारा राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में प्रस्तुत किए गए। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता और लोड शेडिंग के संबंध में सरकार से जवाब मांगा था।

शिवराज बनाम मोहन राज: आंकड़ों में बड़ा बदलाव

राज्यसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश ने बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को तेजी से पाटा है। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल (2022-23) के दौरान, राज्य को साल भर में 92,325 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता थी, लेकिन मांग के मुकाबले 358 मिलियन यूनिट बिजली कम पड़ गई थी। यह कमी 0.4% थी, जिसके कारण कई इलाकों में लोड शेडिंग या अघोषित कटौती देखने को मिलती थी।

डॉ. मोहन यादव के मौजूदा वित्तीय वर्ष (2024-25, जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार) में बिजली की कमी घटकर मात्र 9 मिलियन यूनिट रह गई है। यह चौंकाने वाली बात है कि शिवराज काल की तुलना में बिजली की किल्लत में 97% से अधिक की गिरावट आई है, और अब राज्य में बिजली की कमी तकनीकी रूप से 0.0% के स्तर पर पहुंच गई है।

मांग बढ़ने पर भी आपूर्ति में सुधार

शिवराज काल (2022-23) में बिजली की मांग लगभग 92 हजार मिलियन यूनिट थी, वहीं मोहन यादव के कार्यकाल (2024-25) में यह बढ़कर 1,04,445 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। मांग में 13% की महत्वपूर्ण वृद्धि होने के बावजूद, बिजली की कमी बढ़ने के बजाय घट गई है, जो राज्य की बेहतर बिजली प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रिकॉर्ड रोशनी

2014 के समय जब गांवों में मात्र 12.5 घंटे बिजली मिलती थी, वह अब मोहन यादव सरकार के समय बढ़कर औसतन 22.6 घंटे हो गई है। इसका मतलब है कि अब गांव और शहर के बीच बिजली आपूर्ति का अंतर लगभग खत्म हो गया है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

अब क्यों गुल होती है बिजली?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य में बिजली की कोई वास्तविक कमी (शॉर्टेज) नहीं है। यदि अब भी कहीं बिजली गुल होती है, तो उसका कारण बिजली की अनुपलब्धता नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर तारों का टूटना, ट्रांसफार्मर का खराब होना, या रखरखाव जैसे तकनीकी और स्थानीय कारण होते हैं। यह स्थिति राज्य में बिजली के बेहतर बुनियादी ढांचे और प्रबंधन को प्रमाणित करती है।

Gulzar Ahmad