मध्य प्रदेश में नशीली दवाओं पर रोक के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित

· 1 min read
मध्य प्रदेश  में नशीली दवाओं पर रोक के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित

मध्य प्रदेश में नशीली दवाओं पर रोक के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन

मध्य प्रदेश में हाल ही में कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के मामलों ने राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने नशीली दवाओं और अवैध ड्रग व्यापार पर नियंत्रण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे और इसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

समिति का उद्देश्य और कार्य

सरकार के आदेश के अनुसार, इस समिति का मुख्य उद्देश्य राज्य में ड्रग कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम है। समिति विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी और ड्रग्स नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत बनाएगी। इसके साथ ही, प्रदेश में हाल में बढ़े कफ सिरप और नशीली दवाओं से जुड़ी घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

समिति में शामिल प्रमुख अधिकारी

इस समिति में निदेशक एसएफएसएल, क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा कंपनी के अधिकारी, गृह मंत्रालय (खुफिया ब्यूरो) के प्रतिनिधि, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के क्षेत्रीय प्रमुख, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के प्रतिनिधि, और राज्य एड्स नियंत्रण समिति (एसएसीएस) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा, सक्षम प्राधिकारी और प्रशासक SAFEM (FOP) अधिनियम, 1976, और NDPS अधिनियम, 1985 के प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे।

एनसीओआरडी कमेटी का योगदान

समिति में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निदेशक और क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार डीडीजी को सह-सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। यह समिति नशीली दवाओं के प्रवर्तन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर काम करेगी और राज्य में अवैध ड्रग व्यापार को जड़ से खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी।

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता

राज्य सरकार का मानना है कि इस समिति के गठन से ड्रग्स नियंत्रण व्यवस्था और एंटी-नार्कोटिक्स एक्शन को मजबूत आधार मिलेगा। सरकार ने यह कदम प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। इस समिति के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध व्यापार पर लगाम लगाने की दिशा में ठोस नीतियां बनाई जाएंगी।

यह कदम न केवल नशीली दवाओं के खिलाफ राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।