मध्य प्रदेश में 'राम वन गमन पथ' बना आस्था का नया ग्लोबल सेंटर, धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़

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मध्य प्रदेश में 'राम वन गमन पथ' बना आस्था का नया ग्लोबल सेंटर, धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़

मध्य प्रदेश में 'राम वन गमन पथ' बना आस्था का नया ग्लोबल सेंटर, धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़

अयोध्या में रामलला के विराजन के बाद अब मध्य प्रदेश का 'राम वन गमन पथ' आस्था के नए ग्लोबल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह सिर्फ श्रद्धा का मामला नहीं है, बल्कि आंकड़ों का एक ऐसा सैलाब है जिसने प्रदेश के पर्यटन के पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विंध्य की कंदराओं से लेकर ओरछा की गलियों तक, 'राम नाम' की गूंज अब विदेशी सैलानियों के बीच भी स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है।

ओरछा: विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा धार्मिक स्थल

प्रदेश के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर ओरछा एक ऐसे अद्वितीय 'ग्लोबल स्पॉट' के रूप में उभरा है, जहां साल भर में रिकॉर्ड 10,311 विदेशी सैलानियों ने राम राजा के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह संख्या मध्य प्रदेश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों में विदेशी पर्यटकों की तुलना में सर्वाधिक है।

चित्रकूट में भक्तों का अथाह सागर

चित्रकूट की स्थिति भी बेहद प्रभावशाली है, जहां हर गुजरते मिनट के साथ 30 नए श्रद्धालु मंदाकिनी के तट पर राम-नाम का संकल्प दोहरा रहे हैं। साल 2024 में चित्रकूट में 1.19 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि 2025 में नवंबर तक ही यह आंकड़ा 1.60 करोड़ के पार पहुंच गया है। इसका मतलब है कि केवल 11 महीनों में ही चित्रकूट में 41 लाख नए भक्त जुड़े हैं, जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है।

अमरकंटक में मर्यादा पुरुषोत्तम की पदचाप

वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने अमरकंटक की पहाड़ियों और नर्मदा तट पर लंबा समय व्यतीत किया था। आंकड़े दर्शाते हैं कि अमरकंटक में भी आस्था का ग्राफ रिकॉर्ड तोड़ रहा है। वर्ष 2024 में यहां 40 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, लेकिन 2025 में नवंबर तक यह संख्या 40.62 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। मां नर्मदा का उद्गम स्थल होने के साथ-साथ इस पथ का आकर्षण इसलिए भी विशेष है क्योंकि श्रद्धालु यहां की मिट्टी में आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम के चरणों की रज महसूस करते हैं।

शक्ति पीठों में भी भारी जनसैलाब

मध्य प्रदेश में मां दुर्गा के तीन प्रमुख स्वरूपों, मैहर की मां शारदा, सलकनपुर की मां विजयासन और दतिया की मां पीताम्बरा के दरबार में भी हर महीने 17 लाख से अधिक भक्त पहुंच रहे हैं। 2025 में मैहर में भक्तों की संख्या 1.57 करोड़ हो गई है। इसी प्रकार, सलकनपुर धाम में भी 32.29 लाख लोगों ने दर्शन किए हैं। दतिया की पीताम्बरा पीठ में भी विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है, जहां साल भर में 700 से ज्यादा विदेशी मेहमानों ने पीताम्बरा माई के दरबार में मत्था टेका है। यह सभी आंकड़े प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता और उसकी वैश्विक पहचान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

Ravi Yadav