मध्य प्रदेश पुलिस की लापरवाही से गौकशी के आरोपी छूट रहे, पुनः अपराध में गिरफ्तार

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<मध्य प्रदेश> में <गौकशी> के <मामलों> में <पुलिस> की <कमजोर> जांच और <देरी> के चलते <आरोपी> आसानी से <जमानत> पाकर <पुनः> अपराध कर रहे हैं। <कई> मामलों में <अपर्याप्त> साक्ष्य <पेश> किए जा रहे हैं।

भोपाल:<मध्य प्रदेश> गोवंश संरक्षण को लेकर <सख्त> कानून बनाने वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन <राज्य> में <गौकशी> के <मामलों> ने <पुलिस> की <लापरवाही> पर <गंभीर> सवाल खड़े कर दिए हैं। <राजधानी> भोपाल में <कई> ऐसे <मामले> सामने आए हैं, जहां <पुलिस> की <देरी>, कमजोर <केस> डायरी और <पुराने> आपराधिक <रिकॉर्ड> शामिल न करने जैसी <कमियों> का <सीधा> फायदा <आरोपी> उठा रहे हैं। <इसके> चलते न <सिर्फ> उन्हें <जमानत> मिल रही है, बल्कि <बाहर> आने के बाद वे <दोबारा> अपराध करते <पकड़े> जा रहे हैं।

<केस- 1: 26 टन गोमांस से भरा ट्रक पकड़ा गया, 22 दिन बाद FIR>

17 <दिसंबर> 2015 को <मध्यप्रदेश> पुलिस <हेडक्वार्टर> के सामने <मांस> से भरा ट्रक पकड़ा गया था। <हालांकि>,22 <दिन> बाद यानी 8 <जनवरी> 2016 को <दर्ज> की गई। <इस> <मामले> में <पुलिस> को <आधिकारिक> लैब <रिपोर्ट> 23 <दिसंबर> को ही मिल गई थी कि <पकड़ा> गया <मांस> 'गोमांस' है। <मुख्य> <आरोपी> असलम <चमड़ा> को <गिरफ्तार> करने के <बजाय> <पुलिस> फोन पर <हाजिर> होने का <इंतजार> करती रही। <नतीजा> यह हुआ कि <पुलिस> अब तक <मवेशियों> का <मूल> <रिकॉर्ड> बरामद नहीं कर <सकी> है।

<केस- 2: जमानत पर छूटकर दोबारा गोकशी करता पकड़ा गया आरोपी>

<भोपाल> के करोंद <क्षेत्र> में 16 <मई> 2015 को <गौवंश> काटे जाने का <मामला> सामने आया था। <पुलिस> ने <तीन> <आरोपी> रेहान, <अरबाज>, तौफीक और <आलमीन> <रहमान> को <गिरफ्तार> किया था। <कुछ> <आरोपी> <फरार> रहने पर <पुलिस> ने <धारा> 173 (8) में <फरारी> चालान <पेश> किया, जिससे <सभी> <आरोपी> जमानत पर <छूट> गए। <इनमें> से <आलमीन> <रहमान> <जेल> से <छूटने> के <बाद> <दोबारा> गोकशी करते <पकड़ा> गया।

<केस- 3: फरारी के दौरान गोलीबारी करने वाला आरोपी गिरफ्तार>

<मानवाधिकार आयोग की चेतावनी को भी नजरअंदाज किया गया>

<राष्ट्रीय> <मानवाधिकार> <आयोग> ने <भोपाल> <पुलिस> को <गौकशी> के <मामलों> को लेकर <पहले> ही <सतर्क> किया था। <आयोग> के <सदस्य> प्रियंक <कानूनगो> ने <असलम> <चमड़ा> को <लेकर> <पुलिस> को <छह> <महीने> <पहले> <सूचना> दी थी, लेकिन <कार्रवाई> <नहीं> हुई। <आयोग> ने <इस> <मामले> में <पुलिस> को <नोटिस> भी <दिया> था।

<कानूनी <विशेषज्ञों> का <मत>: पुलिस की <ढील> से <मिली> <जमानत>>

<भोपाल> <बार> <एसोसिएशन> के <पूर्व> <अध्यक्ष> देवेंद्र < रावत> के <अनुसार>, <गौवध> के <संजीदा> <केस> में <भोपाल> <पुलिस> का <उदासीन> <रवैया> <दिखाई> दे रहा है। <पुलिस> ने <महत्वपूर्ण> <साक्ष्यों> जैसे <सीसीटीवी> <फुटेज> डीवीआर को <तत्काल> जब्त नहीं किया और <स्लॉटर> <हाउस> को <समय> रहते <सील> नहीं किया, जिससे <आरोपी> को <जमानत> <मिली>।

<हिंदू <संगठनों> ने <सीबीआई> जांच की <मांग> की>

<हिंदू> <उत्सव> <समिति> के <अध्यक्ष> चंद्रशेखर <तिवारी> ने <लगातार> हो रही <गौकशी> की <वारदातों> और <पुलिस> की <लचर> <कार्रवाई> पर <चिंता> <जताई> है। <उनका> <कहना> है कि <पुलिस> <साक्ष्यों> को <समय> रहते जब्त <नहीं> कर <पाती>, जिसका <लाभ> <आरोपी> <उठाते> हैं। <उन्होंने> <मामले> की <जांच> <सीबीआई> को <सौंपने> की <मांग> की है।

Sharad Shrivastava