मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जेल अधीक्षक पर 17 दिन की अवैध हिरासत पर जुर्माना

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जेल अधीक्षक पर 17 दिन की अवैध हिरासत पर जुर्माना

सजा के बाद भी 17 दिन जेल में रखने पर हाईकोर्ट सख्त, जेल अधीक्षक पर जुर्माना

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सजा पूरी होने के बावजूद एक युवक को अतिरिक्त 17 दिन तक जेल में रखे जाने के मामले में कठोर रुख अपनाते हुए सागर जेल अधीक्षक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित अधिकारी से वसूल कर जमा कराई जाए।

डिवीजन बेंच का आदेश और मुआवजा दावा की स्वतंत्रता

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने यह आदेश टीकमगढ़ जिले के निवासी अरविंद कुशवाहा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी कि वह 17 दिनों की अवैध हिरासत के लिए उचित मुआवजा प्राप्त करने का दावा दायर कर सकता है।

चोरी के मामले में सजा, अवधि पूरी होने के बाद भी जेल में बंद

टीकमगढ़ जिले के डीगोड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम मड़वारा के निवासी अरविंद कुशवाहा को डीजे वाहन से एम्प्लीफायर चोरी करने के आरोप में 5 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल के बाद अदालत ने उसे एक वर्ष की सजा सुनाई थी। यह सजा अवधि 4 नवंबर 2025 को पूरी हो गई, लेकिन इसके बावजूद उसे 20 नवंबर 2025 तक जेल में रखा गया।

अवैध हिरासत को हाईकोर्ट में चुनौती

सजा पूरी होने के बाद हिरासत में रखे जाने को चुनौती देते हुए अरविंद कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से अधिवक्ता संजना यादव ने अदालत को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता को अब रिहा किया जा चुका है, लेकिन उसे 17 दिनों तक गैरकानूनी रूप से जेल में रखा गया था, जो गंभीर लापरवाही का मामला है।

अन्य मामले में भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल

इसी समाचार के संदर्भ में एक अन्य मामले का उल्लेख किया गया, जिसमें इंदौर के चंदन नगर पुलिस थाने की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। पॉक्सो एक्ट के एक मामले में पुलिस ने आरोपी की जगह उसके इंजीनियर बेटे को लगभग 30 घंटे तक हिरासत में रखा और उसे हथकड़ी भी लगाई, जबकि उस बेटे की इस केस में कोई भूमिका या आरोपित स्थिति नहीं बताई गई। इस घटना से भी पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही के मुद्दों पर चर्चा तेज हुई है।

Gulzar Ahmad