मध्यप्रदेश में 111 साल पुराने आबकारी कानून में बदलाव की तैयारी
मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा वित्त व वाणिज्यिक कर विभाग के मंत्री जगदीश देवड़ा ने राज्य की आबकारी व्यवस्था को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 1915 में बने आबकारी अधिनियम के जो प्रावधान आज की परिस्थितियों में अव्यावहारिक हो गए हैं, उनमें संशोधन किया जाएगा।
1915 के आबकारी अधिनियम में समयानुकूल संशोधन की तैयारी
जगदीश देवड़ा ने कहा कि आबकारी अधिनियम में होने वाले संशोधन समयानुकूल होंगे और इन्हें आज की स्थिति के हिसाब से तैयार किया जाएगा। उनका कहना है कि पुराने प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी और जो धाराएं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपयोगी नहीं रही हैं, उनमें आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। यह प्रयास विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
राजस्व लक्ष्य और बकाया वसूली पर सख्त निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने बैठक में आबकारी राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी राजस्व का लक्ष्य 18 हजार करोड़ रुपये रखा गया है, जिसे मार्च 2026 तक हासिल करने का लक्ष्य है। उन्होंने 1000 करोड़ रुपये की आबकारी बकाया राशि की वसूली के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए और कहा कि जिन प्रकरणों में मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां विशेष प्रयास कर संपूर्ण राशि वसूल की जाए।
नई आबकारी नीति 2026-27 पर चर्चा और सुझाव
जगदीश देवड़ा ने वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक में विभागीय अधिकारियों से सुझाव लिए। उन्होंने कहा कि नई नीति के लिए सभी जिला अधिकारी अपने सुझाव लिखित रूप में भी दे सकते हैं, ताकि नीति निर्माण में जमीनी अनुभव और समस्याओं को शामिल किया जा सके। बैठक में आबकारी राजस्व में वृद्धि, अवैध शराब पर नियंत्रण और विभागीय कार्य प्रणाली को मजबूत बनाने से जुड़े बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
अवैध शराब के कारोबार पर कड़ी निगरानी के निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों से कहा कि किसी भी परिस्थिति में अवैध शराब का कारोबार नहीं होना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। भोपाल, धार, ग्वालियर और रायसेन में हाल में की गई शराब जब्ती की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिना परमिट शराब के परिवहन पर कड़ी रोक लगाने पर बल दिया।
ग्रामीण महिलाओं की शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर
जगदीश देवड़ा ने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं द्वारा शराब की दुकानों से संबंधित मिलने वाली शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी शिकायतों का यथाशीघ्र और प्रभावी निराकरण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जिम्मेदारी, इच्छाशक्ति और मजबूती के साथ काम करें, ताकि आम जनता की चिंताओं का समाधान समय पर हो सके।
जहरीली शराब की घटनाओं पर शून्य सहनशीलता
उपमुख्यमंत्री ने जहरीली शराब की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त की और स्पष्ट किया कि किसी भी जिले में इस प्रकार की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जहरीली शराब से संबंधित कोई घटना सामने आती है, तो संबंधित जिला आबकारी अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा, क्योंकि ऐसी घटनाओं से सरकार की छवि धूमिल होती है।
उड़नदस्तों की सक्रियता और विभागीय जांचों में तेजी
बैठक में विभाग में लंबित विभागीय जांचों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता और संभागीय उड़नदस्तों को और अधिक सक्रिय करने पर जोर दिया गया, ताकि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
अधिकारियों का मनोबल बढ़ाने पर भी ध्यान
जगदीश देवड़ा ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को उच्चतर पदनाम देकर उनका मनोबल बढ़ाने के प्रयास जारी रखे जाएंगे। इसके जरिए आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में अधिकारियों की भागीदारी और जिम्मेदारी को मजबूत करने की बात कही गई।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार आबकारी कानूनों और नीतियों में व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ा रही है। 1915 के पुराने अधिनियम में संशोधन, राजस्व बढ़ाने के लक्ष्य, अवैध और जहरीली शराब पर सख्त कार्रवाई तथा शिकायतों के त्वरित समाधान जैसे उपायों के माध्यम से सरकार आबकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितोन्मुख बनाने की तैयारी में है।
Bhavanesh Soni