मध्यप्रदेश सरकार भू-अर्जन मुआवजा बढ़ाने की तैयारी, नई मंत्री समिति बनाएगी फार्मूला

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मध्यप्रदेश सरकार भू-अर्जन मुआवजा बढ़ाने की तैयारी, नई मंत्री समिति बनाएगी फार्मूला

मध्यप्रदेश में भू-अर्जन मुआवजा बढ़ोतरी पर विचार, मंत्री समिति गठित

मध्यप्रदेश सरकार विकास परियोजनाओं में किसानों और भूमिधारकों को दिए जाने वाले भूमि अर्जन मुआवजे में संभावित बढ़ोतरी की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में भू-अर्जन मुआवजा गणना फैक्टर निर्धारण के लिए मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

मंत्री समिति का गठन और उद्देश्य

सरकार ने भू-अर्जन मुआवजा गणना फैक्टर निर्धारण समिति में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप को शामिल किया है। यह समिति विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली सरकारी और निजी भूमि के बदले मिलने वाले मुआवजे की गणना के मौजूदा फार्मूले की समीक्षा करेगी और आवश्यक बदलावों पर सुझाव देगी।

फिलहाल मध्यप्रदेश में मुआवजा गणना का फैक्टर-1 लागू है। समिति को इस फैक्टर को बढ़ाने की संभावना पर विचार करने और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों की राय जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

किसानों और आम नागरिकों के हितों पर जोर

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने मंत्रालय में आयोजित समिति की बैठक में कहा कि औद्योगिक विकास, अधोसंरचना निर्माण और अन्य विकास योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही उन किसानों और आम नागरिकों के हितों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, जिनकी भूमि इन परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाई जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि अर्जन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे प्रभावित परिवारों को उचित, न्यायसंगत और बेहतर मुआवजा मिल सके और मुआवजा राशि की गणना में किसी प्रकार की विसंगति न रहे। मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस उद्देश्य से ही भू-अर्जन मुआवजा गणना फैक्टर निर्धारण के लिए मंत्री समिति का गठन किया गया है।

सुझाव लेने की प्रक्रिया और अंतिम तिथि

समिति किसानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, किसान संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सहित विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव लेगी। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई।

सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 तय की गई है। इसके लिए सरकार ने ईमेल आईडी [email protected] जारी की है, जिस पर कोई भी नागरिक अपने सुझाव भेज सकता है। प्राप्त सुझावों का व्यवहारिक और तथ्यात्मक अध्ययन करने के बाद समिति आगे की आवश्यक कार्यवाही करेगी और अपनी अनुशंसाएं सरकार के समक्ष रखेगी।

आगे की दिशा

समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार भविष्य में भू-अर्जन मुआवजा राशि से संबंधित नीति और गणना फैक्टर में बदलाव कर सकती है। सरकार का कहना है कि उसका प्रयास विकास कार्यों और प्रभावित परिवारों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके और मुआवजा विवादों में कमी आए।

Satyam Tripathi