महागठबंधन में दरार या मजबूती? तेजस्वी-सहनी के बीच सियासी खींचतान

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महागठबंधन में दरार  या मजबूती? तेजस्वी-सहनी के बीच  सियासी खींचतान

महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर सियासी खींचतान

बिहार की राजनीति में महागठबंधन और NDA के बीच सियासी समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तेजस्वी ने साफ शब्दों में सहनी को कहा है कि अगर वह महागठबंधन में रहकर चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें राजद की शर्तों को मानना होगा।

सहनी का बदला हुआ रुख

मुकेश सहनी ने हाल ही में अपने फेसबुक अकाउंट से एक ऐसी तस्वीर साझा की जिसमें महागठबंधन का कोई जिक्र नहीं था। इसके विपरीत, तीन दिन पहले उन्होंने एक पोस्ट किया था जिसमें महागठबंधन सरकार का उल्लेख था। इस बदले हुए रुख ने अटकलों को और हवा दे दी है।

आईपी गुप्ता से तेजस्वी की मुलाकात

इस विवाद के बीच, तेजस्वी यादव ने इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के मुखिया आईपी गुप्ता से मुलाकात की। गुप्ता ने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे "खास शाम" बताया। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

NDA की आपात बैठक

महागठबंधन में चल रहे इस विवाद के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने NDA सहयोगियों के साथ दिल्ली में एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में सहनी के नाम पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, अगर सहनी महागठबंधन छोड़ते हैं और NDA में शामिल होते हैं, तो उन्हें सीटें देने का निर्णय किया जा सकता है।

सहनी का महत्त्व

मुकेश सहनी ने पिछले एक दशक में बिहार की निषाद समुदाय में अपने नेतृत्व को मजबूत किया है। इस समुदाय का बिहार में करीब 2.5% जनसंख्या है, जो कई सीटों पर हार-जीत का निर्णय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

महागठबंधन पर असर

अगर सहनी महागठबंधन से अलग होते हैं, तो यह गठबंधन के लिए बड़ा झटका होगा। तेजस्वी यादव ने EBC और OBC वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सहनी को अपने साथ जोड़ा था। सहनी के अलग होने से तेजस्वी की रणनीति को नुकसान हो सकता है।

NDA को फायदा

सहनी के NDA में जाने से बीजेपी को मिथिलांचल और कोसी क्षेत्रों में फायदा होगा। इन इलाकों में निषाद समुदाय का प्रभाव है और यह बीजेपी का गढ़ माना जाता है।

आने वाले दिन निर्णायक

महागठबंधन की फाइनल मीटिंग अब दिल्ली में होगी, जहां तेजस्वी यादव और लालू यादव कांग्रेस और राजद के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। सहनी का फैसला बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि महागठबंधन मजबूत रहेगा या इसमें दरार आएगी।