मनरेगा से गांधी नाम हटाने पर विधानसभा में कांग्रेस का जोरदार विरोध, भाजपा पर निशाना

· 1 min read
मनरेगा से गांधी नाम हटाने पर विधानसभा में कांग्रेस का जोरदार विरोध, भाजपा पर निशाना

मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर विधानसभा में कांग्रेस का विरोध

मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा और उसके बाहर दोनों जगह कड़ा विरोध दर्ज कराया। विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विधायक विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा पर एकत्र हुए और नारेबाजी की।

उमंग सिंघार के आरोप और सवाल

सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महात्मा गांधी के नाम को बदल रही है। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा को बापू के नाम से डर लगता है या वह उनका सम्मान नहीं करती। सिंघार का कहना था कि इतनी बड़ी योजना से गांधी जी का नाम हटाना उनके विचारों और संविधान के मूल्यों पर सीधा हमला है।

सिंघार ने आगे कहा कि सरकार 2047 का विजन डॉक्युमेंट तो बता रही है, लेकिन मास्टर प्लान कब लाएगी, यह स्पष्ट नहीं कर रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्ड मनी लांड्रिंग केस में कोर्ट द्वारा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट नहीं लेने के बावजूद केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया और दावे

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने सदन में कहा कि सरकारें और घोषणाएं आती-जाती रहती हैं, लेकिन इतिहास उसी को याद रखता है जिसने आम आदमी के जीवन में बदलाव किया हो। उन्होंने बताया कि वे जनजाति क्षेत्र से आते हैं और अपने एक कार्यकर्ता के साथ हादसे के बाद उन्होंने स्वयं वाहन चलाना शुरू किया।

खंडेलवाल के अनुसार, अब तक वे लगभग चार हजार शवों को खुद उनके गंतव्य तक पहुंचा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया जाना चाहिए कि उन्होंने लोगों को अंतिम समय में सहारा देने से जुड़ी सुविधा शुरू की है।

सरकारी विजन और प्रशासन पर सवाल

जबलपुर पूर्व से विधायक लखन घनघोरिया ने सदन की चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां सरकार के विजन पर गंभीर विमर्श होना था, लेकिन बहस 2003 और 2047 के आसपास ही घूमती रह गई। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद का हवाला देते हुए कहा कि घमंड में आदमी फूल सकता है, लेकिन फल नहीं सकता, और सत्ता में बैठे लोगों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।

घनघोरिया ने आरोप लगाया कि सरकार में 75 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं और अधिकतर काम आउटसोर्स के जरिए करवाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इससे प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

निष्कर्ष

मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने का मुद्दा विधानसभा में राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। जहां कांग्रेस इसे गांधी के विचारों और संविधान पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा अपने जनहित कार्यों और विजन का बचाव कर रही है। इस बहस के बीच प्रशासनिक रिक्तियों, आउटसोर्सिंग और एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे सवाल भी सदन में जोरदार तरीके से उठे।

Adarsh Chaurasiya