आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का संकल्प: जबलपुर-ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटन बनाने की घोषणा
मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश का विज़न सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य ने बीमारू प्रदेश की पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सरकार में विकास के रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ाए हैं।
इंदौर-भोपाल के बाद अब जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि इंदौर और भोपाल के लिए मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र पहले ही गठित किए जा चुके हैं। अब सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपॉलिटन एरिया का दर्जा देने का है। उन्होंने कहा कि 2026 में सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
आर्थिक विज़न: तेज वृद्धि और पाँच साल में बजट दोगुना करने का लक्ष्य
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था इस समय लगभग 14 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। उन्होंने आगामी पाँच वर्षों में राज्य का बजट दोगुना करने का संकल्प रखते हुए इसे आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य से जोड़ा।
पीएम मित्रा पार्क और किसानों के हित
मुख्यमंत्री ने पीएम मित्रा पार्क की चर्चा करते हुए कहा कि इसके माध्यम से मालवा और निमाड़ के कपास उत्पादक किसानों को उनका उचित हक दिलाया जाएगा। उन्होंने विकास और संस्कृति को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बताते हुए कहा कि राज्य में दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहल
डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय और अद्वैत लोक जैसी अवधारणाओं के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही। उनका मानना है कि इन योजनाओं के जरिए राज्य विकास की नई राह पर आगे बढ़ सकता है, जबकि सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत होगी।
वर्षवार थीम: गौसंरक्षण, औद्योगिक विकास और कृषि उद्योग
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2024 को गौसंरक्षण वर्ष, 2025 को औद्योगिक विकास वर्ष और 2026 को कृषि उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उनके अनुसार, इन तीनों क्षेत्रों पर केंद्रित प्रयास से राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण ढांचे को मजबूती मिलेगी।
विशेष सत्र का उद्देश्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विशेष सत्र की शुरुआत में बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह सत्र आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विज़न तथा प्रदेश की लगभग 8 करोड़ जनता की आकांक्षाओं पर व्यापक चर्चा करना है।
उन्होंने कहा कि नेक इरादे, साफ नीयत, जनहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर जनता की भलाई के लिए नया इतिहास लिखा जाएगा। तोमर ने यह भी उल्लेख किया कि लगभग 10 साल बाद इस विषय पर विशेष सत्र बुलाया गया है।
सत्रों का इतिहास और विशेष बैठक
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, स्थापना के 69 वर्षों में अब तक कुल 191 बार सदन के सत्र आहूत हुए हैं। वर्तमान 16वीं विधानसभा का यह विशेष सत्र 192वीं बैठक के रूप में आयोजित किया गया है। बीते 70 वर्षों में मध्यप्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 4499 विधायक निर्वाचित हो चुके हैं।
जानकारी दी गई कि अब तक विधानसभा के एक दिनी विशेष सत्र आठ बार बुलाए गए हैं। इस बार भी विशेष सत्र में विकसित मध्यप्रदेश के विज़न पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी
विशेष सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मंत्री राकेश सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
विधानसभा परिसर में स्थापना के 69 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री ने किया।
भविष्य में फिर विशेष सत्र का सुझाव
मंत्री प्रहलाद पटेल ने सुझाव दिया कि जब पाँच साल बाद मध्यप्रदेश विधानसभा के 75 वर्ष पूरे हों, तब भी इसी तरह का एक विशेष सत्र आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि राज्य के विकास के विभिन्न आयामों पर फिर से विचार किया जा सके।
कुल मिलाकर, विशेष सत्र में आत्मनिर्भर, विकसित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मध्यप्रदेश के दीर्घकालिक विज़न को रेखांकित करते हुए आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कई लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
Navjeet Kaur