2 साल का जश्न,उपलब्धि और नया रोड मैप तैयार

(सवाल दर सवाल)
~ राकेश अग्निहोत्री
मोहन काल के 2 साल के जश्न की तैयारी..तैयारी भी ऐसी वैसी नहीं 12 दिसंबर को प्रेस कांफ्रेंस के साथ शुरू होकर अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिन 25 दिसंबर तक चलेगी..प्रेस कॉन्फ्रेंस का सिलसिला जिला मुख्यालयों तक पहुंचेगा..कैबिनेट के सहयोगी मंत्रियों को बड़ी जवाबदेही अपनी सरकार की उपलब्धियां को सामने रखने के लिए सौंपी जाएगी...सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रीवा और ग्वालियर से मोहन सरकार की पीठ थपथपाते हुए उसकी दिशा को रेखांकित कर बदलती भाजपा के रोड मैप को सामने रखेंगे..इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मध्य प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं की नई सौगात देने के लिए भी आएंगे.. सियासी संदेश राजधानी भोपाल से पूरे मध्यप्रदेश जाना है तो सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस और मैनेजमेंट के मोर्चे पर ही पटकथा को जमीन पर उतारने की तैयारी नहीं बल्कि भोपाल के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए राजधानी के चारों ओर चार द्वार स्थापित कर संस्कृति की धरोहर को संजोकर आगे बढ़ाने की नई लाइन खींच दी जाएगी.. सियासत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के इस सीमित कालखंड में उनके अपने गृह जिले उज्जैन से आगे पूरे प्रदेश के समुचित विकास का मूल्यांकन कर अगले 3 साल का रोड मैप सामने लाने की कवायद तेज हो जाएगी..योजना विकास के साथ अभ्युदय मध्य प्रदेश की परिभाषा और उसकी हकीकत का एहसास प्रदेश के मतदाताओं को कराना अब बिना समय गवाएं जरूरी हो गया है.. मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री के काम काज के मूल्यांकन का समय भी आ चुका है.. क्योंकि पॉलिटिक्स में परसेप्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. फ्री हैंड नेतृत्व के बावजूद मोहन ने मंत्रिमंडल पुनर्गठन और राजनीतिक नियुक्तियां का रास्ता रोककर किसी दूरगामी रणनीति के संकेत जरूर दे दिए हैं.. मोहन काल में अभ्युदय मध्य प्रदेश की चर्चा खूब रही..2 साल में मोहन की मुरली की धुन में कौन नाचे,गाए और थिरकते रहे..मुरली ने किसे लुभाया और कौन इससे वंचित रह गया..कहीं खुशी कहीं गम लेकिन अब इस जश्न के सहभागी सभी बनेंगे..
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अपने दो वर्ष पूरे करने जा रही है. जिसने शिव के राज से भाजपा को न सिर्फ बाहर निकाला..बल्कि हर 6 महीने के कालखंड में अपनी सरकार को एक नई पहचान देकर उसे रफ्तार देने की कोशिश की.. हाई कमान की आंख के तारे मोहन बने हुए हैं तो मध्य प्रदेश में ऐसे भी उनके सहयोगी जिनकी आंख में वह खटकते हैं.. बावजूद इसके संभल कर लेकिन जिद और जुनून के साथ जोश में नई सोच के साथ फैसला ले रहे..अटकलें और कायसवाजी पर पूर्ण विराम लगाते हुए हिंदुत्व के नए पुरोधा बनकर उभरे मोहन ने बेफिक्री से हाई कमान के एजेंडे को आगे बढ़ाया.. कुछ विवादों को छोड़ दिया जाए तो उज्जैन पर फोकस लेकिन भोपाल से पूरे प्रदेश के लिए एक सख्त सियासी संदेश जिन्होंने अपनी शर्तों पर समझौता न करते हुए काफी हद तक एक नजीर पेश की है.. शपथ के बाद थोड़ा झिझकने वाला मोहन समूची पार्टी और मंत्रिमंडल को अपने पीछे चलने को ही नहीं तालियां बजाने को मजबूर कर चुका है.. अफसर भी मोहन की कार्यशैली और अपेक्षाओं से भली बात अवगत हो चुके हैं.. मुख्यमंत्री का अपना कोर ग्रुप लेकिन सुनते सब की और करते मन की है..प्रेशर पॉलिटिक्स से दूर बेहिचक फैसला लेने में दृढ़ता,निश्चिंत्यता का स्पष्ट संदेश चाहे फिर वह विरोधी दल कांग्रेस हो या फिर उनकी अपनी पार्टी के प्रतिस्पर्धी महत्वाकांक्षी नेता जो उनके नेतृत्व को ना तो पचा पा रहे और ना ही ठुकरा पा रहे..मोहन काल को मुख्यमंत्री..केवल प्रशासनिक उपलब्धियों का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक–सांस्कृतिक नैरेटिव का विस्तार भी साबित करना चाहते है, जिसे सरकार ने “अभ्युदय मध्य प्रदेश” का नाम दिया..यह अवधारणा सीधे-सीधे दो मूल स्तंभों पर खड़ी दिखती है, हिंदुत्व, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का पुनरुत्थान और विरासत का संरक्षण विकास की नई परिभाषा गढ़ते हुए भय, भूख और भ्रष्टाचार से मुक्त सुशासन की स्थापना..वह बात और है कि इसे चुनौती कहे या फिर समस्या का समाधान ऊपर से नीचे सकारात्मक और परिणाम मूलक संदेश..स्पष्टता से पहुंचाने की जरूरत अभी भी महसूस की जा रही है..बड़ी उपलब्धि के तौर पर डॉ. मोहन यादव का कार्यकाल प्रदेश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की मजबूत पुनर्स्थापना के लिए जाना जाएगा..संघर्ष को पहली प्राथमिकता और बड़ी चुनौती मानते हुए उन्होंने आस्था और विकास को एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि परस्पर पूरक मानकर आगे बढ़ाया है..धार्मिक पर्यटन बढ़ाने की नींव मजबूत की गई है,जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था,होटल–ट्रैवल–रोजगार को फायदा हो सकता..कह सकते हैं देश के दिल मध्य प्रदेश से राज्य की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई..बड़े धार्मिक आयोजन और आधुनिक सुविधाओं का मेल सरकार की “आस्था से अभ्युदय” की परिभाषा को मजबूत करता दिखा..संदेश साफ:“विकास केवल आर्थिक नहीं, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति से भी होता है”.
भय,भूख,भ्रष्टाचार पर संदेश ऊपर से नीचे जाना होगा
अभ्युदय मॉडल का दूसरा स्तंभ: भय, भूख और भ्रष्टाचार से मुक्त सुशासन को लेकर अभी बहस हो सकती है..सरकार ने अपने दो वर्षों में यह बताने की कोशिश की कि “अभ्युदय” का अर्थ केवल मंदिर–धरोहरों का निर्माण नहीं,बल्कि जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में सरकार की भूमिका को पारदर्शी और भयमुक्त बनाना भी है..सरकार ने संदेश दिया कि “अभ्युदय केवल सांस्कृतिक पुनरुत्थान नहीं, बल्कि युवा क्षमता के विस्तार का भी दूसरा नाम है”.दो साल का राजनीतिक मूल्यांकन किया जाए तो स्थिरता और नैरेटिव निर्माण पर गौर करना होगा..अपने पहले दो वर्षों में मोहन सरकार तीन चीजें स्थापित करने में सफल रही..पहला स्थिर नेतृत्व..डॉ.मोहन यादव ने खुद को “संगठन–अनुशासित,विचारधारा समर्पित और प्रशासनिक..जिम्मेदार” नेता के रूप में प्रस्तुत किया..दूसरा स्पष्ट संदेश वाली सरकार..“अभ्युदय” का नैरेटिव जनता तक एक रोचक और विश्वसनीय अवधारणा के रूप में पहुँचा,क्योंकि इसमें आस्था भी विकास भी,और सुशासन का वादा भी देखा जा सकता..तीसरा संदेश संतुलन साधने की राजनीति..भाजपा में संगठन का अपना महत्व और मोहन की जमावट संगठन में अब नजर आने लगी है..मोहन सरकार ने संगठन केंद्रीय नेतृत्व,संतुलित मंत्रिमंडल और सहयोगी समूहों में समन्वय स्थापित करने की कोशिश की.यह उस राजनीतिक वातावरण में महत्वपूर्ण हो जाता है जब नेतृत्व परिवर्तन के बाद अक्सर स्थिरता चुनौती बन जाती है..फिर भी सवाल खड़ा होना लाजमी है क्या अभ्युदय मॉडल भय..भूख..भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का चेहरा बन सकता है?
“अभ्युदय” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सुशासन का क्या ब्रांड बन सकता है..फिलहाल यह मॉडल जनता में आस्था–आधारित विकास और भयमुक्त व्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक प्रयोग के रूप में समझा जा रहा है..मध्य प्रदेश की दूसरी भाजपा सरकारों खासतौर से शिवराज सरकार की लाडली बहना योजना को एक नई ऊंचाई दिलाने की लाइन पर डॉ मोहन यादव आगे बढ़ चुके हैं..तो दूसरे भाजपा शासित राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश को देश के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाने को लेकर मोहन संजीदा और संकल्पवान नजर आते है.
उपलब्धियों ने संवारा..डबल इंजन का विकास
मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने दो वर्षों में 'अभ्युदय मप्र' स्लोगन को साकार करते हुए विरासत से विकास की अनूठी मिसाल पेश की है..केंद्र और राज्य की समन्वित शक्ति से प्रदेश ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मोर्चों पर अभूतपूर्व प्रगति की,जहां प्राचीन धरोहरों को आधुनिक विकास से जोड़ा गया..तो विरासत से विकास का एजेंडा प्रमुख रहा,इसमें 6 डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें..महेश्वर, इंदौर, सिंगरामपुर, पचमढ़ी, जबलपुर और खजुराहो में आयोजित की गईं,जहां क्षेत्रीय सौगातों को प्रमुखता तो प्रदेश को आर्थिक गति देने का विजन दिखा..करीब 8 रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचारों से औद्योगिक प्रगति को गति मिली, जिससे निवेश और रोजगार के नए द्वार खुले.महिला सशक्तिकरण में लाड़ली बहना योजना और महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण जैसी पहल क्रांतिकारी साबित हुई.युवाओं के लिए रोजगार मेलों का आयोजन, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, NDDB के साथ एमओयू और ग्वालियर में देश का पहला बायो सीएनजी प्लांट जैसे कदमों से रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिला..GYAN आधारित 4 मिशन- गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी पर फोकस करते हुए समावेशी विकास पर जोर देने सरकार की दूरदर्शिता का प्रमाण है..जल संसाधनों में नदी लिंक परियोजनाएं जैसे ताप्ती-बेसिन,केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल ने सिंचाई और जल सुरक्षा को मजबूती दी.धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देते हुए श्रीराम वन पथ गमन, श्रीकृष्ण पाथेय और धार्मिक स्थलों का उन्नयन किया गया..असहाय,गरीब,निर्धन को बेहतर स्वास्थ सेवाएं प्रदान करने पीएमश्री एयर एम्बुलेंस तो पर्यटन के लिए हेली सेवा भी सराही गई..उज्जैन में मेडीसिटी का निर्माण,जो मेडिकल कॉलेज के साथ अनुसंधान केंद्र और सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा होने वाला पहला एकीकृत स्वास्थ्य हब है,प्रदेश की स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि का प्रतीक माना जा रहा है..सांदीपनि विद्यालय,प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस,सायबर तहसील,एक बगिया माँ के नाम अभियान और विक्रमोत्सव जैसे कार्यक्रमों ने शिक्षा,पर्यावरण और संस्कृति को मजबूती देने का काम किया..चीतों का मध्यप्रदेश में पुनर्वास भी बड़ी उपलब्धि सरकार की रही..तो देश के 4 प्रमुख औघोगिक पार्कों में पीएम मित्र पार्क से जनजातीय अंचल में रोजगार के अवसर खोलने का काम हुआ..कुल मिलाकर डॉ मोहन सरकार के पास बताने को इन दो सालों में उपलब्धियों की भरमार है..तो 'अभ्युदय मप्र' के स्लोगन के साथ अब अगले तीन वर्षों का रोडमैप भी तैयार है.डबल इंजन सरकार का यह मूल्यांकन साबित करता है कि विरासत और विकास का सामंजस्य मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर भारत का मजबूत स्तंभ बना रहा है.'अभ्युदय' यानि उन्नति, तरक्की, उदय, प्रादुर्भाव,वृद्धि तो दार्शनिक अर्थ.. सांसारिक सुख और समृद्धि की प्राप्ति,जिसे धर्म का एक लक्ष्य माना गया है,मोहन सरकार के इस सूत्र वाक्य 'अभ्युदय मध्य प्रदेश' ने ही सरकार से अपेक्षाएं बढ़ा दीं..अपेक्षा मीडिया की हेडलाइन से आगे जमीन पर मध्य प्रदेश को एक अलग नई पहचान देने की..उन्नति और तरक्की समाज के हर वर्ग की दलगत राजनीति से ऊपर..नई पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए अगले दो दशक की चुनौतियां को ध्यान में रखते हुए मोहन सरकार से रिकॉर्ड पूंजी निवेश को जमीन पर उतर कर दिखाने की..विकास की दिशा कुछ ऐसी की..सामाजिक सद्भाव,समरसता मजबूत हो.