मोहन सरकार आज लेगी 3,000 करोड़ का नया कर्ज
शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदेश की मोहन सरकार विकास कार्यों के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश कर रही है। इसके साथ ही सरकार आज 3,000 करोड़ रुपए के नए कर्ज के लिए नीलामी प्रक्रिया (ऑक्शन) करेगी, जिसका भुगतान सरकार को अगले दिन प्राप्त होगा। यह पूरा कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से लिया जा रहा है और इस पर ब्याज का भुगतान वर्ष में दो बार, जून और दिसंबर में किया जाएगा।
तीन किस्तों में 3,000 करोड़ का कर्ज
वित्त विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार तीन अलग-अलग कर्ज लेगी, प्रत्येक की राशि 1,000 करोड़ रुपए होगी। पहला कर्ज 1,000 करोड़ रुपए का होगा, जिसकी मूलधन और ब्याज सहित अदायगी सरकार आठ साल की अवधि में करेगी। दूसरा कर्ज भी 1,000 करोड़ रुपए का होगा, जिसे 13 साल में चुकाया जाएगा। तीसरा 1,000 करोड़ रुपए का कर्ज 23 साल की लंबी अवधि में वापस किया जाएगा। इन तीनों कर्जों पर ब्याज का भुगतान छह-छह माह के अंतराल पर जून और दिसंबर में ही किया जाएगा।
पहले भी लिया जा चुका है बड़ा कर्ज
इससे पहले 11 नवंबर को हुई नीलामी के बाद सरकार ने 12 नवंबर को 1,500-1,500 करोड़ रुपए के दो कर्ज और 1,000 करोड़ रुपए का एक अन्य कर्ज लिया था। ये कर्ज क्रमशः 16 साल, 22 साल और 19 साल की अवधि के लिए हैं। इन पर कूपन रेट के आधार पर ब्याज का भुगतान वर्ष में दो बार, प्रत्येक छह माह में किया जाएगा।
इसी प्रकार 28 अक्टूबर को भी सरकार ने 5,200 करोड़ रुपए के कर्ज उठाए थे। उस समय 2,700 करोड़ रुपए की पहली राशि 21 साल की अवधि के लिए और 2,500 करोड़ रुपए की दूसरी राशि 22 साल की अवधि के लिए ली गई थी।
कर्ज की सीमा के भीतर है उधारी
सरकार ने दावा किया है कि वर्तमान उधारी कर्ज लेने की निर्धारित सीमा के भीतर है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने खुद को 12,487.78 करोड़ रुपए के रेवेन्यू सरप्लस में बताया है। इस वर्ष कुल आमदनी 2,34,026.05 करोड़ रुपए और कुल खर्च 2,21,538.27 करोड़ रुपए रहा।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश सरकार की संशोधित आमदनी 2,62,009.01 करोड़ रुपए और खर्च 2,60,983.10 करोड़ रुपए अनुमानित है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1,025.91 करोड़ रुपए सरप्लस के रूप में बताई गई है। सरकार का कहना है कि जो नया कर्ज लिया जा रहा है, वह इन्हीं वित्तीय अनुमानों और निर्धारित लोन लिमिट के भीतर है।
कर्ज लेने का सिलसिला जारी
विभिन्न तिथियों पर लिए गए कर्जों के आधार पर स्पष्ट है कि सरकार लंबे समयावधि वाले बॉन्ड के जरिए चरणबद्ध तरीके से उधारी बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य वित्तीय आवश्यकताओं और विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना बताया जा रहा है, जबकि राजस्व सरप्लस के आंकड़ों के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि कर्ज प्रबंधन नियामकीय सीमा के भीतर है।
Sachin Saxena