इंदौर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, 15 दिन में बीआरटीएस की एक लेन तोड़ने के आदेश

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इंदौर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, 15 दिन में बीआरटीएस की एक लेन तोड़ने के आदेश

इंदौर में ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त, बीआरटीएस की एक लेन 15 दिन में तोड़ने का आदेश

जनहित याचिका पर सुनवाई, बीआरटीएस हटाने में देरी पर नाराजगी

इंदौर शहर में बिगड़ते यातायात प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को तोड़ने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया और 15 दिन के भीतर बीआरटीएस की एक तरफ की लाइन का हिस्सा तोड़कर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

कलेक्टर और निगम आयुक्त कोर्ट में पेश, अगली तारीख पर डीसीपी ट्रैफिक भी तलब

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजयकुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की डबल बेंच में हुई। पेशी के दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव अदालत में उपस्थित रहे। अदालत ने अगली सुनवाई पर डीसीपी ट्रैफिक को भी व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश जारी किए हैं।

याचिकाकर्ता ने ट्रैफिक अव्यवस्था के कई मुद्दे उठाए

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय बागडिया ने एक अतिरिक्त आवेदन दाखिल कर शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। आवेदन में बीआरटीएस तोड़ने में देरी के साथ ही प्रशासनिक आदेशों के बावजूद रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में बज रहे डीजे से होने वाली परेशानी, शहर की सड़कों पर जगह-जगह अतिक्रमण और धार्मिक चबूतरों के कारण यातायात में बाधा, शाम के समय बढ़ते ट्रैफिक दबाव से उत्पन्न अव्यवस्था को रोकने के लिए अधिकारियों की सड़कों पर तैनाती, तथा शहर के अधिकांश उद्यानों में अतिक्रमण कर बनाए गए मंदिरों जैसी समस्याओं को उठाया गया।

पुराने आदेशों के पालन और विस्तृत रिपोर्ट की मांग

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका में पहले दिए गए अदालत के पुराने आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाए। साथ ही, याचिकाकर्ता के नए आवेदन में उठाए गए यातायात संबंधी मुद्दों के निराकरण पर भी जोर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 16 दिसंबर से पूर्व बीआरटीएस की एक लाइन तोड़ने की प्रगति और अन्य ट्रैफिक संबंधी कदमों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए।

अगली सुनवाई 16 दिसंबर को, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी फिर होंगे उपस्थित

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। अदालत ने आदेश दिया है कि उस तारीख को कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को दोबारा उपस्थित होना होगा, साथ ही डीसीपी ट्रैफिक को भी व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। अदालत के इन निर्देशों को शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और बीआरटीएस से जुड़े विवाद को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है।

Sachin Saxena