मप्र में 10 लाख बेसहारा गायें अब हाइटेक चिप से होंगी मॉनिटरिंग

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मप्र में 10 लाख बेसहारा गायें अब हाइटेक चिप से होंगी मॉनिटरिंग

मध्य प्रदेश में बेसहारा गायों की निगरानी के लिए हाइटेक चिप सिस्टम

मध्य प्रदेश में पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सड़कों पर भटक रही बेसहारा गायों की समस्या से निपटने के लिए हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी की है। विभाग का लक्ष्य है कि अगले दो साल में ऐसी गायें सड़कों पर नजर न आएं।

दो साल में सड़कों से हटेंगी बेसहारा गायें

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री लखन पटेल ने विभाग की दो साल की उपलब्धियां बताते हुए स्वीकार किया कि प्रदेश में करीब 10 लाख बेसहारा गायें हैं। विभाग के मुताबिक फिलहाल लगभग 4.75 लाख गायें गोशालाओं में हैं, जबकि बाकी सड़कों पर भटक रही हैं। मंत्री ने कहा कि गोशालाएं विकसित कर दो साल के भीतर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गायें सड़कों पर न दिखें।

50 स्वावलंबी आधुनिक गोशालाओं की योजना

विभाग जल्द ही प्रदेश में 50 स्वावलंबी, आधुनिक गोशालाएं खोलने की तैयारी कर रहा है। इनमें से 20 गोशालाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। योजना के अनुसार इन गोशालाओं में न्यूनतम 5 हजार गायों को रखने की क्षमता होगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में करीब 3 हजार गोशालाएं होने के कारण उनकी मॉनिटरिंग चुनौतीपूर्ण है, लेकिन 50 आधुनिक गोशालाओं पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।

चिप के जरिए गायों की रोजाना निगरानी

नई आधुनिक गोशालाओं में रखी जाने वाली गायों की पहचान और निगरानी के लिए उनके शरीर में चिप लगाई जाएगी। विभाग के अनुसार मेटैलिक चिप को गाय के कंधे में इंजेक्ट किया जाएगा। इस चिप में गाय की नस्ल, उम्र और गोशाला में आने की तारीख जैसी जानकारियां दर्ज होंगी। अधिकारी हैंड हेल्ड डिवाइस की मदद से इन जानकारी को सॉफ्टवेयर में अपलोड कर मुख्यालय भेजेंगे, जिससे रोजाना मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। मंत्री ने कहा कि चूंकि ऐसी केवल 50 गोशालाएं होंगी, इसलिए वे और अधिकारी स्वयं भी नियमित रूप से वहां निरीक्षण कर पाएंगे।

अज्ञात नस्ल की गायों पर विशेष ध्यान

एसीएस उमाकांत उमराव ने बताया कि गोशालाओं में अधिकतर अज्ञात नस्ल की गायें रहती हैं। उन्होंने कहा कि इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए अज्ञात नस्ल के बैलों का बंध्याकरण किया जाएगा। साथ ही ऐसी नस्लों की गायों की ब्रीडिंग उच्च नस्ल के साथ करवा कर नस्ल सुधार की दिशा में भी काम किया जाएगा।

उद्देश्य: गोशालाओं को स्वावलंबी और सड़कों को सुरक्षित बनाना

पूरी योजना का उद्देश्य गोशालाओं को तकनीकी रूप से सक्षम और स्वावलंबी बनाना है, ताकि बेसहारा गायों की सुरक्षित देखभाल हो सके और सड़कों पर आवारा पशुओं की वजह से होने वाली समस्याएं कम हों। विभाग का मानना है कि हाईटेक मॉनिटरिंग और नस्ल सुधार के प्रयासों से आने वाले वर्षों में स्थिति में सुधार दिखाई देगा।

Satyam Tripathi