मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र, पूर्व मुख्यमंत्रियों का योगदान और भविष्य की घोषणाएं
मध्यप्रदेश विधानसभा के 69 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक यात्रा, पूर्व मुख्यमंत्रियों की भूमिका और वर्तमान सरकार की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कैलाश विजयवर्गीय ने 17 मुख्यमंत्रियों के योगदान गिनाए
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश की स्थापना से अब तक रहे 17 मुख्यमंत्रियों और उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल से लेकर सबसे लंबे कार्यकाल वाले शिवराज सिंह चौहान तक सभी की कार्यशैली और उपलब्धियों का उल्लेख किया। इस सूची में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों दलों के मुख्यमंत्री शामिल रहे।
विजयवर्गीय ने शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं जैसे लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, जननी एक्सप्रेस और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी नकल देश भर में हो रही है। उन्होंने महाकाल लोक और एकात्म धाम का श्रेय भी शिवराज सिंह चौहान को दिया।
कमलनाथ के संदर्भ में विजयवर्गीय ने कहा कि उनमें मजबूत प्रशासनिक क्षमता थी और औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सिंगल विंडो प्रणाली की शुरुआत उन्हीं ने की। उन्होंने कहा कि कमलनाथ के पास कई योजनाएं थीं, लेकिन समय कम होने के कारण वे उन्हें पूरी तरह लागू नहीं कर सके।
उमा भारती के योगदान में एमपीआरडीसी के गठन, 10 हजार करोड़ रुपये की सड़कों के निर्माण और विरोध के बावजूद हरसूद को खाली कराए जाने का उल्लेख किया गया, जिसके बाद इंदिरा सागर बांध पहली बार भरा। दिग्विजय सिंह के बारे में कहा गया कि संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट, बाणसागर बांध और कोलार जल परियोजना में उनके प्रयास महत्वपूर्ण रहे और उनसे राजनीतिक सौजन्यता सीखने की जरूरत है।
अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों की भूमिका
विजयवर्गीय ने पंडित रविशंकर शुक्ल द्वारा नियोगी आयोग के गठन और धर्मांतरण रोकने की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। कैलाशनाथ काटजू के नाम पर वल्लभ भवन निर्माण को याद किया गया। द्वारिका प्रसाद मिश्रा को प्रदेश में कई विश्वविद्यालयों की स्थापना और राजनीति में रणनीतिक भूमिका के लिए रेखांकित किया गया।
गोविंद नारायण सिंह के योगदान में रीवा में एपीएस यूनिवर्सिटी की स्थापना और विंध्य क्षेत्र में बाणसागर बांध को मंजूरी दिलाने की बात कही गई। राजा नरेशचंद्र को मध्यप्रदेश के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में याद किया गया। श्यामाचरण शुक्ल के बारे में कहा गया कि उन्होंने प्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दिया।
एम.एन. बुच के संदर्भ में प्रशासन को स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर देने की बात कही गई। प्रकाशचंद्र सेठी को कानून व्यवस्था मजबूत करने और चंबल में डकैतों के आत्मसमर्पण की पहल के लिए याद किया गया। कैलाश जोशी को ग्रामीण विकास की नींव रखने वाला मुख्यमंत्री बताया गया, जबकि वीरेंद्र कुमार सकलेचा के बारे में कहा गया कि उन्होंने नर्मदा घाटी विकास कार्यों को आगे बढ़ाया।
अर्जुन सिंह को कला, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के साथ प्रशासनिक दक्षता दिखाने के लिए याद किया गया। मोतीलाल बोरा को संवेदनशील और मेहनती प्रशासन के लिए उल्लेखित किया गया। सुंदरलाल पटवा और बाबूलाल गौर के बारे में कहा गया कि उन्होंने अतिक्रमण हटाने और कानून व्यवस्था मजबूत करने पर काम किया।
मोहन यादव पर टिप्पणी और औद्योगिक विकास की सराहना
जब चर्चा मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर आई तो कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें वर्तमान युग का नेता बताते हुए टी-20 क्रिकेट के उदाहरण से उनकी तुलना कप्तान से की। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जैसे सूर्यकुमार यादव मैदान में उतरते ही खिलाड़ियों को किट बांटते हैं, वैसे ही हमारे कप्तान हैं, बस फर्क इतना है कि हमारे कप्तान खुद सूट-बूट में आ गए हैं और बाकी लोग सामान्य रूप से बैठे हैं। इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे।
विपक्ष की ओर से विधायक महेश परमार ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह किट पूरे 230 विधायकों को मिलनी चाहिए। इसके साथ ही विजयवर्गीय ने औद्योगिक विकास के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणाएं और आश्वासन
विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लाड़ली बहनों की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि जहां विपक्ष 3000 रुपये देने की बात कर रहा है, वहीं उनकी सरकार लाड़ली बहनों को आगे चलकर 5000 रुपये प्रति माह तक सहायता देने की योजना रखती है।
बेरोजगारी और रोजगार सृजन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास वर्ष 2047 तक का रोडमैप तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकारी विभागों में एक वर्ष के भीतर एक लाख पदों पर भर्ती की जाएगी और अगले पांच वर्षों में ढाई लाख सरकारी पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
नेता प्रतिपक्ष द्वारा 2026 तक की गारंटी मांगने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास अपने संकल्प पत्र के वादों को 2028 तक पूरा करने का समय है और वे इन्हें तय समय पर पूरा करेंगे।
सत्र का समापन और राजनीतिक संदेश
विशेष सत्र में जहां एक ओर मध्यप्रदेश के 69 वर्ष के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास का स्मरण किया गया, वहीं दूसरी ओर वर्तमान सरकार ने भविष्य के लिए योजनाओं और वादों को स्पष्ट किया। पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान के विस्तृत उल्लेख के साथ ही मोहन सरकार ने औद्योगिक विकास, सामाजिक योजनाओं और रोजगार के क्षेत्र में अपने रोडमैप का संकेत दिया। इस तरह सत्र ने अतीत की समीक्षा और भविष्य की दिशा, दोनों को समान रूप से सामने रखा।
Janmejay Chaturvedi