मराठा आरक्षण आंदोलन पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त
आंदोलनकारियों को सड़कों से हटने का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों को मुंबई की सड़कों से हटने का सख्त आदेश दिया। अदालत ने कहा कि आंदोलन के कारण मुंबई में आम जनजीवन बाधित हो रहा है और शहर लगभग ठप हो गया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि गणेश उत्सव के समय शहर को अव्यवस्थित नहीं होने दिया जा सकता।
आंदोलन के चलते ट्रैफिक और न्यायपालिका पर असर
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आंदोलनकारियों ने न्यायालय परिसर को घेर लिया है, जिससे जजों और वकीलों की आवाजाही बाधित हो रही है। सोमवार को जजों की गाड़ियों को रोका गया, जिससे कोर्ट का कामकाज प्रभावित हुआ। आंदोलन की वजह से दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया है।
राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह आंदोलनकारियों को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाए और मंगलवार तक यह बताए कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सरकारी वकील ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने आजाद मैदान में दी गई अनुमति की अवधि का उल्लंघन किया है।
मराठा आरक्षण की मांग और आंदोलन का इतिहास
मराठा समुदाय के नेता मनोज जरांगे पिछले कई वर्षों से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इस बार उन्होंने 29 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की है। उनकी मांग है कि मराठा समुदाय को 10% आरक्षण दिया जाए। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में आरक्षण की अधिकतम सीमा को पार करने का आधार नहीं मानते हुए मराठा आरक्षण खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने आंदोलनकारियों को नवी मुंबई में दूसरी जगह देने का सुझाव देते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
यह मामला मराठा समुदाय की आरक्षण की पुरानी मांग को लेकर उठी नई चुनौती को दर्शाता है। अदालत और सरकार को मिलकर इस समस्या का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना होगा।