मतदाता सूची में बड़े फेरबदल, जबलपुर-बुरहानपुर फोकस में

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मतदाता सूची में बड़े फेरबदल, जबलपुर-बुरहानपुर फोकस में

मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में बड़े बदलाव, व्यापक पुनरीक्षण की तस्वीर साफ

मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद राज्य के वोटर डेटा की पूरी तस्वीर सामने आ गई है। इसमें मृत मतदाताओं, शिफ्टेड वोटर्स, मल्टीपल एंट्री और नो मैपिंग जैसी श्रेणियों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है, साथ ही ऐसे मतदाताओं को अपने दस्तावेज देकर नाम दोबारा जुड़वाने का मौका भी दिया गया है।

ड्राफ्ट में 42.74 लाख नाम बाहर, 8.65 लाख वोटर्स को नोटिस

चुनाव आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची में प्रदेश के 42.74 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। इनमें से 8 लाख 65 हजार 832 ऐसे मतदाता हैं जिनसे आयोग संपर्क नहीं कर सका और जिनका डेटा 2003 की पुरानी SIR सूची से मेल नहीं खाया। इन्हें नो मैपिंग श्रेणी में रखा गया है।

बुधवार से इन 8.65 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन्हें आयोग द्वारा तय 11 प्रकार के पहचान एवं पते से संबंधित दस्तावेज बीएलओ के सामने प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेज सत्यापित होने पर इनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे।

कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था

SIR के प्रारंभिक चरण में राज्य में उन इलाकों की पहचान की गई, जहां नेटवर्क कमजोर या धीमा था। ऐसे क्षेत्रों में नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को बेहतर नेटवर्क वाले स्थानों पर जाकर गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन करने की सुविधा दी गई, ताकि पूरा काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा हो सके।

शिफ्टेड और अनुपस्थित मतदाताओं का आंकड़ा

मतदाता स्थान परिवर्तन के मामलों में भोपाल प्रदेश में सबसे आगे रहा। यहां 2 लाख 86 हजार 661 मतदाता शिफ्ट पाए गए। इसके बाद इंदौर में 1 लाख 97 हजार 898, ग्वालियर में 1 लाख 48 हजार 273, जबलपुर में 1 लाख 15 हजार 437 और सागर में 80 हजार 901 मतदाता दूसरे स्थान पर शिफ्ट हुए दिखे। सभी जिलों को मिलाकर शिफ्टेड वोटर्स की कुल संख्या 22 लाख 78 हजार 393 है।

एबसेंट यानी अनुपस्थित मतदाताओं की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर में 1 लाख 75 हजार 424 मतदाता अपने पते पर नहीं मिले। भोपाल में यह संख्या 1 लाख 1 हजार 503, जबलपुर में 66 हजार 678, ग्वालियर में 61 हजार 520 रही। पूरे प्रदेश में एबसेंट मतदाताओं की कुल संख्या 8 लाख 42 हजार 677 दर्ज की गई।

मृत मतदाताओं में जबलपुर सबसे ऊपर

ड्राफ्ट डेटा के मुताबिक मृत मतदाताओं की सूची में जबलपुर सबसे ऊपर है। यहां 51 हजार 357 ऐसे नाम पाए गए जिनके धारक अब जीवित नहीं हैं लेकिन नाम सूची में बने हुए थे। इंदौर में 43 हजार 741, सागर में 36 हजार 467, भोपाल में 33 हजार 791, धार में 27 हजार 943, ग्वालियर में 27 हजार 852 और उज्जैन में 27 हजार 851 मृत मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए।

सभी जिलों को मिलाकर मृत श्रेणी वाले मतदाताओं की संख्या 8 लाख 46 हजार 184 निकलकर आई है।

नो मैपिंग और मल्टीपल एंट्री के मामले

नो मैपिंग वाले मतदाताओं, यानी जिनका डेटा पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खा पाया, उनमें इंदौर सबसे आगे है। यहां 1 लाख 33 हजार 696 मतदाताओं के नाम इस श्रेणी में हैं। भोपाल में 1 लाख 16 हजार 925, जबलपुर में 69 हजार 394, ग्वालियर में 68 हजार 540 और उज्जैन में 48 हजार 35 मतदाताओं के नाम भी नो मैपिंग के तहत दर्ज हैं। पूरे प्रदेश में इस श्रेणी की कुल संख्या 8 लाख 65 हजार 832 है।

एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने यानी मल्टीपल एंट्री के मामले में अपेक्षाकृत छोटा जिला बुरहानपुर बड़े शहरों से आगे निकल गया है। यहां 23 हजार 594 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मिले। इंदौर में 22 हजार 808, धार में 14 हजार 198, भोपाल में 14 हजार 171, उज्जैन में 14 हजार 100, जबलपुर में 13 हजार 869, सागर में 10 हजार 160 और ग्वालियर में 8 हजार 893 मतदाताओं के नाम भी मल्टीपल एंट्री में पाए गए।

युवा मतदाताओं के नाम जुड़वाने की प्रक्रिया

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि जो युवा मतदाता 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। इसके लिए वे भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट Voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म-6 भर सकते हैं, या फिर ऑफलाइन माध्यम से अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं।

दावा-आपत्ति की निर्धारित अवधि

SIR ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी। इस अवधि में वास्तविक और योग्य मतदाता अपना नाम जोड़ने, संशोधन कराने या गलत प्रविष्टियों पर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार रखते हैं।

संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के नाम किसी कारणवश काटे गए हैं, वे यदि आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत कर देते हैं तो उनके नाम दोबारा जोड़े जा सकेंगे। जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर मिले हैं, उनका नाम अंतिम सूची में केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा।

कुल मतदाता और प्राप्त गणना पत्रक

प्रदेश में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाता हैं। इनमें से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं के गणना प्रपत्र आयोग को प्राप्त हुए, जिनके आधार पर यह ड्राफ्ट पुनरीक्षण तैयार किया गया। शेष मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया नोटिस और दस्तावेज जांच के माध्यम से पूरी की जाएगी।

अपना नाम कैसे जांचें और दोबारा जोड़ें

23 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाता दो आसान तरीकों से अपना नाम जांच सकते हैं – ऑनलाइन पोर्टल और ऐप के माध्यम से, या ऑफलाइन बीएलओ से संपर्क कर। यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की पुरानी सूची में था, लेकिन 2025 की ड्राफ्ट सूची में नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ड्राफ्ट अंतिम सूची नहीं होती।

ऐसे मतदाता फॉर्म-6 भरकर अपना दावा कर सकते हैं। यह फॉर्म ऑनलाइन Voter Helpline App और पोर्टल के माध्यम से या ऑफलाइन बीएलओ के पास जमा किया जा सकता है। सत्यापन के बाद उनके नाम पुनः मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष: शुद्ध मतदाता सूची की दिशा में बड़ा कदम

मध्य प्रदेश में SIR ड्राफ्ट के जरिए मृत मतदाताओं, डुप्लीकेसी, शिफ्टिंग और नो मैपिंग जैसी समस्याओं को चिन्हित कर मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जबलपुर, इंदौर, भोपाल, बुरहानपुर और अन्य जिलों के विस्तृत आंकड़े सामने आने से राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं दोनों को वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

दावा और आपत्ति की निर्धारित अवधि उन सभी योग्य मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जिनके नाम किसी त्रुटि, डुप्लीकेसी, स्थान परिवर्तन या तकनीकी कारण से सूची से बाहर हो गए हैं। समय पर दस्तावेज जमा कर और जरूरी फॉर्म भरकर वे आगामी चुनावों में अपने मताधिकार को सुरक्षित रख सकते हैं।

Gulzar Ahmad