ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई का पहला बयान: अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे
ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद गुरुवार को अपना पहला बयान जारी किया। इसमें उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद कर दे, नहीं तो उन पर हमले जारी रहेंगे। मुजतबा ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि उन्हें ईरान पर किए गए हमलों की ‘भरपाई’ करनी होगी। ईरान के सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाए गए संदेश में खामेनेई ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता भी नहीं खोला जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध लगातार तेज हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पदभार संभालने के बाद मुजतबा खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया था और वह घायल बताए जा रहे थे। बताया गया कि वह उसी हवाई हमले में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उन्होंने यमन और इराक के सशस्त्र समूहों से भी इस लड़ाई में मदद की अपील की है और पड़ोसी देशों से अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करने का आग्रह किया है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत का रुख
मिडिल-ईस्ट में जारी इस संघर्ष के बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि समुद्री शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि भारत ने ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी थी। जायसवाल ने जानकारी दी कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर लाए गए जीसीसी (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की गई है। इस बीच, भारत सरकार ईरान में फंसे लगभग 9,000 भारतीय नागरिकों की मदद कर रही है, जिसमें वीजा और सड़क मार्ग से सीमा पार करने में सहायता शामिल है। भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत मिली है, जबकि ईरान ने अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी।
बढ़ता तनाव और वैश्विक प्रभाव
इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल आपूर्ति में इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट की चेतावनी दी है। कई बड़ी वित्तीय कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को मिडिल ईस्ट के दफ्तरों से दूर रहने या घर से काम करने का निर्देश दिया है। नेपाल ने संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए कुकिंग गैस की सप्लाई सीमित करने का फैसला किया है। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, युद्ध के कारण अब तक करीब 32 लाख लोग ईरान के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं। यूनिसेफ ने संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चों के घायल या मारे जाने की बात कही है।
सैन्य कार्रवाई और खुफिया आकलन
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 'ट्रू प्रॉमिस-4' ऑपरेशन के तहत मिसाइलों और ड्रोन की 42वीं खेप दागने का दावा किया है, जिसमें तेल अवीव और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने लेबनान में बड़े जमीनी ऑपरेशन की तैयारी का आदेश दिया है, क्योंकि हिजबुल्लाह ने 200 से ज्यादा रॉकेट और ड्रोन दागे थे। इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक महत्वपूर्ण ठिकाने पर भी हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही जंग में अमेरिका जीत चुका है और सैन्य कार्रवाई से ईरान की ताकत कमजोर हुई है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान सरकार के जल्द गिरने की संभावना नहीं है और वह देश पर कंट्रोल बनाए हुए है। पेंटागन के अनुसार, अमेरिका ने जंग के पहले हफ्ते में करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि जंग के कारण कच्चे तेल कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं और वह अमेरिका, इजराइल तथा उनके सहयोगियों तक तेल पहुंचने नहीं देगा।
Sachin Saxena