मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और ऐप का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री निवास में वैदिक घड़ी और उसके मोबाइल ऐप का लोकार्पण

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और ऐप का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत के गौरवशाली समय की पुनर्स्थापना करेगी

मुख्यमंत्री ने किया विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और मोबाइल ऐप का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अनावरण और उसके मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत ने अपने ज्ञान और संस्कृति से पूरी दुनिया को दिशा दी है। भारतीय कालगणना पद्धति का महत्व सैकड़ों वर्षों से पूरी दुनिया में स्वीकार किया गया है।

भारतीय संस्कृति का गौरव – वैदिक घड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संगम है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परंपरा और गौरव का प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के प्राचीन और गौरवशाली समय ज्ञान को पुनर्जीवित किया जा रहा है। यह घड़ी विरासत, विकास, प्रकृति और तकनीक के संतुलन को दर्शाती है।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • निवास के नवनिर्मित द्वार पर वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण हुआ।
  • ‘भारत का समय–पृथ्वी का समय’ रैली शौर्य स्मारक से शुरू होकर मुख्यमंत्री निवास पहुंची।
  • इस अवसर पर राजा भोज पर आधारित यूट्यूब सीरीज का फोल्डर और खगोल विज्ञान पर फिल्म सीडी का विमोचन भी किया गया।
  • मुख्यमंत्री ने युवाओं से वैदिक घड़ी का ऐप डाउनलोड करने का आह्वान किया।

भारतीय कालगणना और ऋतु प्रभाव

डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय व्रत और त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर पर आधारित नहीं, बल्कि ऋतु और प्रकृति से जुड़े हैं। सावन, भादो और कार्तिक जैसे महीनों का प्रभाव हर व्यक्ति महसूस करता है।
उन्होंने बताया कि अमावस्या और पूर्णिमा का असर समुद्र में ज्वार-भाटा और मानव शरीर पर स्पष्ट देखा जा सकता है। यही कारण है कि भारतीय कालगणना वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणिक और सूक्ष्म है।

पंचांग – शुद्धता का प्रमाण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का खगोलीय अध्ययन सूर्य से बनने वाली छाया और उसकी गति पर आधारित है। भारत का कालगणना केंद्र उज्जैन और उसका प्रमुख स्थान डोंगला है, जो भगवान कृष्ण और सुदामा की कथा से भी जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि पंचांग भारतीय गणना की शुद्धता का प्रमाण है, जिसमें आज भी सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, तिथि, नक्षत्र और मुहूर्तों की सटीक जानकारी मिलती है।

प्रदेशवासियों की धरोहर – मुख्यमंत्री निवास

डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास पर स्थापित वैदिक घड़ी सिर्फ मुख्यमंत्री की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेशवासियों की धरोहर है। भारतीय संस्कृति के गौरव को सहेजना और उसे विश्व तक पहुँचाना सरकार की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके प्रयासों से ही 2014 में यूनेस्को ने योग को वैश्विक मान्यता दी। भारत का ज्ञान केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता का धरोहर है।

वैदिक घड़ी और मोबाइल ऐप की खासियतें

  • यह विश्व की पहली घड़ी है जो पूरी तरह भारतीय कालगणना पर आधारित है।
  • इसमें 7,000 साल से अधिक के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, वार, योग और त्यौहारों की जानकारी उपलब्ध है।
  • धार्मिक कार्यों और साधना के लिए 30 शुभ मुहूर्तों की जानकारी और अलार्म सुविधा दी गई है।
  • घड़ी में वैदिक समय (30 घंटे), GMT, IST, मौसम की जानकारी (तापमान, हवा की गति, आर्द्रता) भी देखी जा सकती है।
  • यह ऐप 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है।
  • इसमें हर दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर 30 मुहूर्तों का सटीक विवरण मिलता है।

अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, वैदिक घड़ी के अन्वेषणकर्ता आरोह श्रीवास्तव, विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, विधायक, महापौर और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।