मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना का ऑडिट, पंजीयन अधिक पर रोजगार बेहद कम
तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना का इस वर्ष ऑडिट किया जाएगा। दो वर्ष पहले शुरू हुई इस योजना में बड़ी संख्या में युवाओं ने पंजीयन कराया, लेकिन रोजगार के अवसर अपेक्षाकृत बहुत कम रहे हैं।
9.36 लाख पंजीयन, सिर्फ 3 फीसदी को जॉइनिंग
योजना के तहत अब तक कुल 9.36 लाख युवाओं ने पंजीयन करवाया है, लेकिन इनमें से केवल लगभग 3 प्रतिशत युवाओं को ही ज्वाइन करवाया जा सका। जिन युवाओं को अवसर मिला, उनमें अधिकतर कॉल सेंटर में काम करने वाले हैं, जबकि खनिज, प्रोडक्शन, उत्पादन एवं निर्माण, बैंकिंग, रिटेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और स्वास्थ्य सेवा जैसे करीब 20 अन्य क्षेत्रों में मांग होने के बावजूद पर्याप्त युवा उपलब्ध नहीं हो पाए।
पंजीकृत प्रतिष्ठान और रोजगार में बड़ा अंतर
लगभग 25 हजार प्रतिष्ठानों ने इस योजना के तहत नौकरी देने के लिए पंजीयन कराया, लेकिन इनमें से केवल करीब 8 हजार प्रतिष्ठानों ने ही वास्तव में काम दिया। इससे योजना के पंजीयन और वास्तविक रोजगार के बीच बड़ा अंतर स्पष्ट हुआ है।
साक्षात्कार और अनुबंध में भी गड़बड़ी
समीक्षा के दौरान यह बात भी सामने आई कि साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए कई युवाओं ने अनुबंध रद्द कर दिया। बताया गया कि करीब डेढ़ हजार युवाओं ने नियोजित काम न मिलने के कारण अनुबंध समाप्त कर दिया। विभाग अब इस अंतर और गड़बड़ी के कारणों की जांच करेगा।
विभाग की समीक्षा और सुधार की तैयारी
तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग योजना की व्यापक समीक्षा करने की तैयारी में है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे यह पता लगाएं कि युवा योजना का पूरा लाभ क्यों नहीं ले पा रहे हैं और बड़े क्षेत्रों में युवाओं की कमी क्यों बनी हुई है। इस विषय पर विभाग में इसी माह एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें समस्याओं और संभावित सुधारों पर चर्चा की जाएगी।
युवा दिखा रहे कम दिलचस्पी, मॉनिटरिंग पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण कई प्रतिष्ठानों में रिक्त पद होने के बावजूद युवा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। मुख्य क्षेत्रों में मांग और काम करने वालों की संख्या के बीच स्पष्ट अंतर देखा जा रहा है, जिसे कम करने के लिए विभाग उपाय तलाशेगा।
मंत्री का बयान: समीक्षा के बाद सुधार कार्य शुरू होगा
राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि योजना के तहत सभी वर्ग के युवाओं को लाभ मिले और पंजीयन व रोजगार के बीच अंतर कम हो, इसके लिए विभाग समीक्षा करेगा। समीक्षा में यह देखा जाएगा कि बड़े क्षेत्रों में युवा क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं और उसके आधार पर सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे।
योजना की पृष्ठभूमि और स्टाइपेंड संरचना
मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना अगस्त 2023 में शिवराज सरकार के दौरान शुरू की गई थी। इसमें 18 से 29 वर्ष तक के युवक-युवतियों को शामिल किया गया है। 12वीं पास, आईटीआई या स्नातक-पोस्टग्रेजुएट (यूजी-पीजी) कर चुके युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
योजना के तहत यदि किसी प्रतिष्ठान में युवाओं को प्रशिक्षण व काम का अवसर दिया जाता है तो उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है। 12वीं पास युवाओं को 8 हजार रुपये, आईटीआई धारकों को 8,500 रुपये, डिप्लोमा धारकों को 9 हजार रुपये और यूजी-पीजी या अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। यह स्टाइपेंड युवाओं को कौशल के साथ रोजगार अनुभव दिलाने के उद्देश्य से दिया जा रहा है।
निष्कर्ष: लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर
योजना का उद्देश्य बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार अवसर देना था, लेकिन पंजीकृत युवाओं की तुलना में रोजगार पाने वालों की संख्या फिलहाल बहुत कम है। आगामी ऑडिट और समीक्षा से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्रियान्वयन में कहां कमी रह गई और भविष्य में किन सुधारों से योजना अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।
Navjeet Kaur