नगरीय निकायों में अनुभवी एल्डरमैन बनेंगे भाजपा की नई रणनीति का हिस्सा, एमपी में 1800 वर्कर होंगे एडजस्ट

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नगरीय निकायों  में  अनुभवी एल्डरमैन  बनेंगे भाजपा की नई रणनीति का हिस्सा,  एमपी  में 1800 वर्कर होंगे एडजस्ट

एमपी में नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति: भाजपा की चुनावी रणनीति

मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कार्यकर्ताओं को नगरीय निकायों में एल्डरमैन के रूप में समायोजित करने का फॉर्मूला अंतिम रूप दे दिया है। इस पहल के तहत प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में हफ्ते भर के भीतर एल्डरमैन की सूची घोषित होने की उम्मीद है।

मिशन 'निकाय चुनाव': अनुभवी नेताओं को कमान

भाजपा इस बार एल्डरमैन की नियुक्तियों को केवल पद भरने के तौर पर नहीं, बल्कि निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देख रही है। इस रणनीति के तहत, उन पुराने और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनके पास नगर प्रशासन का गहरा ज्ञान है।

रणनीति के पीछे दो मुख्य उद्देश्य

इस रणनीति के पीछे भाजपा के दो मुख्य उद्देश्य हैं:

बडे़ शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक के लिए फॉर्मूला तय

भाजपा संगठन में कई दौर के मंथन के बाद, नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति के लिए विस्तृत फॉर्मूला तय किया गया है:

इस हिसाब से, 99 नगर पालिकाओं में कुल 594 एल्डरमैन और 298 नगर परिषदों में 1192 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। वहीं, 16 नगर निगमों में कुल 80 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। कुल मिलाकर, प्रदेश के 413 निकायों में 18 सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को इस प्रक्रिया के तहत समायोजित किया जाएगा।

नियम और अधिकार: वोटिंग नहीं कर सकते

नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति का मुख्य आधार प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका अधिनियम की जानकारी होता है। संगठन की सिफारिश पर नियुक्त होने वाले ये एल्डरमैन परिषद की बैठकों और चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं, लेकिन इनके पास मत (वोट) देने का अधिकार नहीं होता। इनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त होता है। सरल शब्दों में, ये परिषद के 'मार्गदर्शक' की भूमिका में होते हैं, 'निर्णायक' की नहीं।

Sachin Saxena