NHRC सदस्य की चेतावनी, भोपाल पुलिस से मछली केस की जानकारी छुपाई गई

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NHRC सदस्य की चेतावनी, भोपाल पुलिस से मछली केस की जानकारी छुपाई गई

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की <मछली केस> में <भोपाल पुलिस> को चेतावनी

राजधानी के चर्चित <मछली परिवार केस> में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एंट्री हो गई है, जिससे मामला और गरमा गया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने <भोपाल पुलिस> की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कानूनगो ने स्पष्ट कहा कि यासीन अहमद उर्फ यासीन मछली और उसके परिवार से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई उन्हें संतोषजनक नहीं लगती।

<कोर्ट> से छुपाई गई जानकारी पर <अफसरों> पर कार्रवाई की चेतावनी

<भोपाल पुलिस> को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण से जुड़ी जो जानकारी पुलिस के पास है और जो अदालत में पेश की गई है, उससे वे पूरी तरह अवगत हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब वे इस मामले में औपचारिक कार्रवाई शुरू करवाएंगे, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो एक मिसाल बनेगी। अब NHRC की सख्ती के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस जांच और कार्रवाई दोनों पर आयोग की नजर और कड़ी हो सकती है।

<मछली केस> का <पृष्ठभूमि>

दरअसल, जुलाई 2025 में <भोपाल पुलिस> ने लिंक रोड नंबर-2 से यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एमडी ड्रग्स, पिस्टल और मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए थे। जांच के दौरान ड्रग तस्करी, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और सरकारी जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर परिवार के सदस्यों पर 13 एफआईआर दर्ज की थीं, जबकि प्रशासन ने करीब 100 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन भी मुक्त कराई थी। वहीं, हाल ही में शारिक मछली समेत अन्य परिजनों से क्राइम ब्रांच ने हाईप्रोफाइल मामलों में पूछताछ भी की है।

'प्रोजेक्ट संकल्प' से <जागरूकता> की <कोशिश>

इसके अलावा लव जिहाद को लेकर प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भोपाल में बढ़ते सांप्रदायिक और लैंगिक अपराधों को देखते हुए एक विशेष पहल के रूप में ‘प्रोजेक्ट संकल्प’ शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट सामाजिक संगठनों के सहयोग से पिछले आठ महीनों से संचालित हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कानूनगो के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 7000 कॉलेज जाने वाली छात्राओं और 1000 फैकल्टी मेंबर्स को कम्युनल जेंडर क्राइम, ग्रूमिंग और रैगिंग के जरिए होने वाले यौन अपराधों के तौर-तरीकों के बारे में जागरूक किया गया है।

उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि प्रोजेक्ट से जुड़ी एक छात्रा के साथ जब इस तरह की घटना हुई, तो उसने न केवल थाने में एफआईआर दर्ज कराई बल्कि आरोपी का सार्वजनिक रूप से विरोध भी किया। कानूनगो ने कहा कि ऐसी हिम्मत समाज में बदलाव का संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के सुधारात्मक कदमों का असर आने वाले 3 से 4 वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। कानूनगो ने कहा कि एक पूरी पीढ़ी को जागरूक करने की जरूरत है और लगातार प्रयासों से इस तरह के अपराधों में कमी लाई जा सकती है।

इकबाल मैदान के नाम पर <सख्त आपत्ति>

प्रियंक कानूनगो ने एक बार भोपाल के इकबाल मैदान के नाम को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जिस शख्स ने देश के विभाजन की सोच को बढ़ावा दिया, उसके नाम पर भोपाल में किसी मैदान का होना गलत है। कानूनगो ने कहा कि ऐसे नामों की यहां कोई जगह नहीं होनी चाहिए और इसे बदलना जरूरी है। उन्होंने ‘इकबाल सम्मान’ जैसे पुरस्कारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नाम पर सम्मान देना उचित नहीं है। कानूनगो के मुताबिक, जिस व्यक्ति की विचारधारा देश के विभाजन से जुड़ी रही हो, उसके नाम पर किसी को सम्मानित करना असल में अपमान के समान है। उन्होंने संकेत दिए कि आगे कदम उठाए जाएंगे।

इतिहास: चार बार भोपाल आए थे <इकबाल>

इतिहास की रिपोर्ट के अनुसार शायर अल्लामा इकबाल चार बार भोपाल आए थे और यहां लगभग छह महीने बिताए थे, इस दौरान उन्होंने अपनी प्रसिद्ध शायरी की रचना की थी। उनकी याद में भोपाल में इकबाल मैदान है, जहां की दीवारों पर उनकी शायरी अंकित है। यह मैदान नवाबों के दौर की याद दिलाता है और एक समय यह सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था।

Janmejay Chaturvedi