पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर हवाई हमला : 80 लड़ाके मारे जाने का दावा, अफगान बोला 16 नागरिक हताहत.

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पाकिस्तान  का  अफगानिस्तान  पर  हवाई हमला : 80  लड़ाके मारे  जाने का दावा, अफगान बोला  16 नागरिक  हताहत.

पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर हवाई हमला: 80 लड़ाके मारे जाने का दावा, अफगान ने कहा 16 नागरिक हताहत

पाकिस्तान का दावा: TTP-IS के 80 लड़ाके मारे

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने सोमवार को बताया कि अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। उनके अनुसार कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने दावा किया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। हालांकि, सरकार ने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया। पाकिस्तान सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले किए, जिसमें TTP और इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े सात कैंपों को निशाना बनाने का दावा किया गया। पाकिस्तान सरकार ने इन हमलों को हालिया आत्मघाती हमलों के बाद की जवाबी कार्रवाई बताया और कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान की जमीन से संचालित नेटवर्क ने कराए थे।

अफगानिस्तान का खंडन: 16 नागरिक मारे गए

दूसरी ओर, अफगानिस्तान सरकार ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इसमें मासूम नागरिकों को निशाना बनाया गया। मीडिया चैनल टोलो न्यूज के मुताबिक, नांगरहार के एक घर को निशाना बनाया गया, जिससे एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) के अनुसार, इन हमलों में 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को अफगानिस्तान की गोपनीयता नीति का उल्लंघन बताते हुए सही समय पर पाकिस्तान को जवाब देने की चेतावनी दी है। अफगान सूत्रों के मुताबिक, पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल और नांगरहार प्रांत में भी ड्रोन हमले हुए।

बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की अपील

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में दोहा में अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो। 2020 का दोहा समझौता अमेरिका और तालिबान के बीच कतर की राजधानी दोहा में हस्ताक्षरित हुआ था, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान में 2001 से चल रहे युद्ध को समाप्त करना और अमेरिकी बलों की वापसी का रास्ता बनाना था। तालिबान ने प्रतिबद्धता जताई थी कि वह अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी समूह या व्यक्ति को इस्तेमाल नहीं करने देगा। इसमें विशेष रूप से अल-कायदा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संबंध तोड़ने और उन्हें अफगानिस्तान में भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग या हमले की अनुमति न देने का वादा शामिल था।

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा TTP

अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है। TTP को पिछले बारह साल में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके सीमा पार अफगानिस्तान से प्रशिक्षण लेकर पाकिस्तान लौटते और हमला करते हैं। हालांकि, तालिबान दावा करता है कि वह TTP का समर्थन नहीं करता। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में आतंकवादी हमले 2015 के बाद सबसे ज्यादा हो गए हैं और TTP ही इसकी मुख्य वजह है। वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के अनुसार, इन हमलों की वजह से ही पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

हालिया आत्मघाती हमले

एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिक मारे गए थे। 16 फरवरी को पाकिस्तान के बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई थी, जिसमें 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई थी। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया था। इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 31 लोगों की मौत हुई थी और 169 घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।

सीमा विवाद और तनाव

अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों तरफ के सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है और वे एक-दूसरे पर हमले व आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के बाद से यह तनाव और बढ़ गया है।

Adarsh Chaurasiya