फ्रांस में बिस्मिल्लाह से ले तेनैब्रे नारा वायरल, पुलिस का मजाक उड़ा रहे छात्र

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फ्रांस में बिस्मिल्लाह से ले तेनैब्रे नारा वायरल, पुलिस का मजाक उड़ा रहे छात्र

फ्रांस के छात्र आंदोलन में 'बिस्मिल्लाह से ले तेनैब्रे' नारे का प्रसार

फ्रांस के छात्र आंदोलन में एक अजीब-सा नारा 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे' वायरल हो गया। जेन-जेड छात्र पुलिस को चिढ़ाने के लिए इस नारे का इस्तेमाल कर रहे हैं। 'बिस्मिल्लाह' अरबी शब्द है जिसका अर्थ 'अल्लाह के नाम पर' होता है, जबकि 'से ले तेनैब्रे' फ्रेंच वाक्यांश है जिसका अर्थ 'यह अंधकार है' होता है। दोनों को मिलाकर इसका मोटा-मोटा अर्थ 'अल्लाह के नाम पर यह अंधकार है' निकलता है, लेकिन यह फ्रांसीसी भाषा का कोई सही वाक्य नहीं है। इसकी अटपटी बनावट और अजीब शब्दों के मेल की वजह से लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं।

भारत में भी जुलाई में छात्र आंदोलन के दौरान 'वास्तेगुना हुइंया' स्लैंग चर्चित हुआ था। इसका भी कोई खास मतलब नहीं था। यह वायरल हुए अंग्रेजी वाक्य 'केन आई गेट ए होया' का बिगड़ा हुआ रूप था।

स्नैपचैट से शुरुआत और पुलिस घुसपैठ की आशंका

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह नारा सबसे पहले सोशल मीडिया स्नैपचैट पर इस्तेमाल किया गया था। एक व्यक्ति ने पिछले महीने छात्र प्रदर्शन आयोजित करने वालों के प्राइवेट चैट ग्रुप में शामिल होने के लिए स्नैपचैट पर कुछ लोगों को मैसेज भेजे। उसने लिखा, 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे।' इसके बाद उसने कहा, 'हम सब कुछ तोड़ देंगे।' उसने अलग-अलग नामों से कई प्रोफाइल बनाकर ये मैसेज भेजे। इनमें मामादू और अब्देल्लाह जैसे नाम शामिल थे। कुछ प्रोफाइल पर अल्जीरिया के झंडे वाले इमोजी भी लगे थे। मैसेज की भाषा और अंदाज कुछ स्नैपचैट यूजर्स को अजीब और मजेदार लगे। उन्होंने इन मैसेज के स्क्रीनशॉट लिए और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। इसके बाद यह वाक्य चर्चा में आ गया। कई युवाओं को शक हुआ कि ये मैसेज पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने भेजे हैं। उन्हें लगा कि अधिकारी छात्र आंदोलनों की अंदरूनी जानकारी हासिल करने के लिए युवाओं की पहचान बनाकर उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मैसेज में इस्तेमाल की गई अटपटी भाषा के कारण उनकी इस कोशिश पर सवाल उठने लगे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे' वाक्य का इस्तेमाल पुलिस का मजाक उड़ाने के लिए करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह वाक्य प्रदर्शन का हिस्सा बन गया और सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया।

आंदोलन की मांगें और दूसरे देशों तक विस्तार

यह नारा अब फ्रांस तक ही सीमित नहीं है। बेल्जियम और जर्मनी में हुए कुछ विरोध प्रदर्शनों में भी युवाओं ने इसका इस्तेमाल किया। इससे यह वाक्य दूसरे देशों में भी चर्चा का विषय बन गया है। छात्रों का कहना है कि नारे की अटपटी भाषा से पता चलता है कि सरकार और युवाओं के बीच कितनी दूरी है। फ्रांस के एक छात्र संगठन की प्रवक्ता सबरीन खरबाच ने कहा कि कोई भी युवा इस तरह बात नहीं करता। उनके मुताबिक, इस नारे के जरिए युवाओं ने उन लोगों का मजाक उड़ाया, जो आंदोलन के अंदर की जानकारी जुटाने के लिए युवाओं के बीच घुसने की कोशिश कर रहे थे।

फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुआ था। सैकड़ों स्कूलों के छात्र जर्जर इमारतों की मरम्मत, शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम करने और पढ़ाई का दबाव घटाने की मांग कर रहे थे। छात्र आंदोलन में मजदूर संगठनों और दूसरे लोग भी शामिल हुए। इसके बाद महंगाई के खिलाफ भी प्रदर्शन होने लगे।

Navjeet Kaur