प्रधानमंत्री मोदी को मिला ट्रंप का न्योता, रुबियो ने की मुलाकात, कूटनीतिक दांवपेंच जारी

· 1 min read
प्रधानमंत्री मोदी को मिला ट्रंप का न्योता, रुबियो ने की मुलाकात, कूटनीतिक दांवपेंच जारी

मोदी को अमेरिका आने का न्योता, रुबियो ने की मुलाकात

कूटनीतिक दांवपेंच और 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया। करीब एक घंटे चली बैठक में <अमेरिका और भारत> के बीच <सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों> के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

रुबियो की यह यात्रा <ट्रंप की चीन यात्रा> के कुछ ही दिनों बाद हो रही है, जिससे अमेरिकी मीडिया इसे <कूटनीतिक> कदम के साथ-साथ 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश बता रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, <ट्रंप की चीन यात्रा> ने <एशिया की राजनीति> में बेचैनी बढ़ाई है, जहाँ उन्होंने <चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग> की खुलकर तारीफ की थी।

भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले साल से तनाव

पिछले साल मध्य से <भारत-अमेरिका संबंधों> में कुछ मुद्दों पर <तनाव> देखा गया था। इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य <दोनों देशों के रिश्तों> को <फिर से मजबूत> करना है। रुबियो का <दिल्ली दौरा> यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि <ट्रंप सरकार> <एशिया> में आगे क्या रणनीति अपनाएगी और <चीन> के साथ उसके रिश्ते की दिशा क्या होगी।

पिछले साल <ट्रंप> ने <भारत> पर <भारी टैरिफ> लगाए थे। <पाकिस्तान> को लेकर भी नया <तनाव> पैदा हुआ है, जहाँ <ट्रंप> ने <पाकिस्तान के नेताओं> की तारीफ की थी, जिसे <भारत> ने <पाकिस्तान को फिर महत्व> देने के संकेत के तौर पर देखा।

ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग पर जोर

<मार्को रुबियो> के दौरे में <ऊर्जा सुरक्षा> एक अहम मुद्दा है। <भारत> <रूस> से तेल खरीद रहा है, वहीं <अमेरिका> चाहता है कि <भारत अमेरिकी तेल और LNG गैस> का आयात बढ़ाए। <ऊर्जा आपूर्ति> को सुरक्षित करने के लिए <भारत> कई देशों से <एनर्जी सप्लाई> सुनिश्चित करना चाहता है।

<भारत और अमेरिका> के बीच <टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों> को लेकर मतभेद थे, लेकिन अब <रिश्तों को मजबूत> करने की कोशिशें जारी हैं। इस दौरे में <व्यापार समझौतों, निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन> पर बातचीत हो सकती है। <सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस> और <आधुनिक तकनीकों> में सहयोग पर भी <चर्चा> की उम्मीद है।

रक्षा साझेदारी भी हो रही मजबूत

<भारत और अमेरिका> के बीच <रक्षा साझेदारी> <पिछले कुछ सालों> में काफी मजबूत हुई है। <भारतीय सेना और वायुसेना> <अमेरिका के आधुनिक डिफेंस इक्विपमेंट> का इस्तेमाल कर रही हैं।जैसे उपकरण शामिल हैं। अब दोनों देश <डिफेंस इक्विपमेंट के जॉइंट प्रोडक्शन> और <नई सैन्य तकनीकों> पर भी साथ काम करना चाहते हैं।

<मार्को रुबियो> <चीन के खिलाफ सख्त रुख> रखने वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं और <भारत के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी> के समर्थक रहे हैं। <एक्सपर्ट्स> का मानना है कि उनका यह दौरा <अमेरिका> के लिए <भारत> को <एशिया> में <अहम रणनीतिक साझेदार> के रूप में दर्शाता है।

Adarsh Chaurasiya