पुतिन को 21 तोपों की सलामी, मोदी संग अहम समिट

· 1 min read
पुतिन को 21 तोपों की सलामी, मोदी संग अहम समिट

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा, 21 तोपों की सलामी और हाई-लेवल समिट

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे हैं। यह यात्रा भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कुशल कार्यबल जैसे कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होनी है।

राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत और राजघाट पर श्रद्धांजलि

पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें रिसीव किया। इसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और गेस्ट बुक पर हस्ताक्षर किए। उनकी सुरक्षा के लिए राजघाट और आसपास के इलाकों में कड़े इंतजाम किए गए थे।

हैदराबाद हाउस में 23वां भारत-रूस शिखर सम्मेलन

राजघाट कार्यक्रम के बाद पुतिन हैदराबाद हाउस के लिए रवाना हुए, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी दो महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें से एक क्लोज-डोर मीटिंग होगी। यह 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी इस बार भारत कर रहा है।

समिट का मुख्य लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार करना है। ऊर्जा, निवेश, तकनीक, उद्योग, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, विज्ञान-तकनीक और पोर्ट डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों में नए समझौतों और सहयोग पर चर्चा की जाएगी।

रक्षा सहयोग: Su-57 और S-500 पर संभावित वार्ता

लेख में बताया गया कि रूस भारत को अपने Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट और उसकी तकनीक बिना शर्त देने के लिए तैयार है। Su-57 को अमेरिका के F-35 के समान पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान माना जाता है, जिसे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है।

रूस का कहना है कि Su-57 की इंजन, रडार, स्टेल्थ तकनीक और आधुनिक हथियारों जैसी अहम तकनीकों पर कोई रोक नहीं होगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे भारत में बनाने की संभावना भी खुली है। दो-सीटर Su-57 के संयुक्त विकास का प्रस्ताव भी रखा गया है।

लेख के अनुसार, भारतीय वायुसेना फिलहाल फाइटर जेट्स की कमी का सामना कर रही है और उसके पास पहले से 200 से अधिक रूसी मूल के लड़ाकू विमान हैं। ऐसे में नए रूसी फाइटर को अपनाना उसके लिए अपेक्षाकृत आसान होगा। साथ ही, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पहले से रूसी विमानों की सर्विसिंग करती रही है, जिससे Su-57 जैसे जेट की देखभाल भारत में ही संभव होगी।

S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर भी भारत की दिलचस्पी का जिक्र किया गया है। यह सिस्टम लंबी दूरी से आने वाली मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों को इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है, जो भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत कर सकता है।

ऊर्जा, भुगतान तंत्र और आर्कटिक प्रोजेक्ट्स

ऊर्जा क्षेत्र इस समिट का एक अहम हिस्सा है। रूस भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल दे रहा है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों और दबावों के कारण भुगतान में दिक्कतें आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एक नए भुगतान तंत्र पर चर्चा की संभावनाएं जताई गई हैं।

रुपया-रूबल व्यापार, डिजिटल पेमेंट सिस्टम या किसी तीसरे देश के बैंक के माध्यम से लेन-देन जैसे विकल्पों पर विचार हो सकता है, ताकि ऊर्जा और अन्य व्यापार बिना रुकावट जारी रह सके। साथ ही, रूस आर्कटिक क्षेत्र में अपनी ऊर्जा परियोजनाओं में भारत को निवेश के अवसर देने पर भी चर्चा कर सकता है, जहां वह बड़े तेल और गैस भंडार विकसित कर रहा है।

कुशल भारतीय कामगारों के लिए बड़े मौके

युद्ध के बाद रूस में कई क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की कमी उत्पन्न हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश एक स्किल डेवलपमेंट और मोबिलिटी पैक्ट पर भी बात कर सकते हैं, जिसके तहत भारत से तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल स्टाफ, इंजीनियर और अन्य प्रशिक्षित कर्मियों को रूस में काम के अवसर मिल सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, लगभग 10 लाख कुशल भारतीय कामगारों को रूस में रोजगार देने के लिए मोबिलिटी समझौते की संभावना है। यह भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी तक ऐसे समझौते केवल जर्मनी और इजराइल के साथ हैं और सिविल न्यूक्लियर डील मुख्यतः अमेरिका और फ्रांस तक सीमित रही है।

दौरे की प्रतीकात्मक और कूटनीतिक अहमियत

पुतिन का भारत आगमन एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं पहुंचकर उनका स्वागत किया और दोनों नेता एक ही गाड़ी से प्रधानमंत्री आवास गए, जहां पुतिन के सम्मान में निजी डिनर रखा गया। यह व्यक्तिगत रसायन और दोनों नेताओं के बीच करीबी समझ को दर्शाता है।

लेख में पुतिन के विमान की उड़ान मार्ग, विशेष फ्लाइट स्क्वाड्रन द्वारा संचालन और उनकी यात्रा से जुड़े प्रोटोकॉल विवरणों का भी उल्लेख है, जो इस दौरे के महत्व और सुरक्षा स्तर को रेखांकित करते हैं।

निष्कर्ष: भारत-रूस संबंधों के नए अध्याय की तैयारी

कुल मिलाकर, पुतिन की यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 21 तोपों की सलामी, राजघाट पर श्रद्धांजलि और हैदराबाद हाउस में प्रस्तावित उच्चस्तरीय मीटिंग्स इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश अपने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

रक्षा क्षेत्र में उन्नत तकनीक, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, नए भुगतान तंत्र, आर्कटिक प्रोजेक्ट्स में भागीदारी और भारतीय कुशल कार्यबल के लिए अवसर जैसे मुद्दे यदि ठोस समझौतों में बदलते हैं तो यह भारत-रूस साझेदारी को दीर्घकाल के लिए सुदृढ़ कर सकते हैं। आने वाले समय में 23वें शिखर सम्मेलन के परिणाम दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Amit Pateria