पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला ने सीधी पेशाब कांड पर फिर उठाए सवाल
मध्यप्रदेश के सीधी जिले से भाजपा के पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला ने 2023 के चर्चित सीधी पेशाब कांड को लेकर पार्टी के ही दो नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बिना नाम लिए वर्तमान विधायक रीति पाठक और सीधी के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा को इस मामले का षड्यंत्रकारी बताया।
षड्यंत्र का आरोप, टिकट कटने का दर्द
विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भोपाल पहुंचे केदारनाथ शुक्ला से बातचीत में उन्होंने कहा कि सीधी पेशाब कांड एक षड्यंत्र था और आज षड्यंत्रकारी सीधी के सांसद और विधायक हैं। उन्होंने कहा कि इस बात की जानकारी प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को भी है, लेकिन घटना हो चुकी है और उसके बाद उनका टिकट काट दिया गया।
शुक्ला से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी संगठन में बात की, तो उन्होंने संकेत दिया कि संगठन स्तर पर नीति संबंधी निर्णय होना बाकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे संगठन में काम भी कर सकते हैं और भविष्य में सीधी से चुनाव भी लड़ सकते हैं।
साजिशकर्ताओं के नाम पर टालमटोल
जब उनसे सीधे पूछा गया कि वे किन नेताओं को षड्यंत्रकारी मानते हैं, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे सीधी के सांसद और विधायक हैं और उनके नाम स्पष्ट हैं। उन्होंने खुले तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन संदर्भ में वर्तमान सांसद और विधायक की ओर इशारा माना जा रहा है।
सांसद राजेश मिश्रा की प्रतिक्रिया
पूर्व विधायक के आरोपों पर सीधी से भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर शुक्ला ने ऐसा कहा है तो उन्हें इसके प्रमाण देने चाहिए। मिश्रा ने कहा कि वे इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते और इतने दिनों बाद ऐसे आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं, इसका जवाब भी शुक्ला ही दे सकते हैं।
सीधी पेशाब कांड: घटना और पुलिस कार्रवाई
4 जुलाई 2023 को सीधी जिले में एक आदिवासी युवक पर नशे की हालत में एक व्यक्ति द्वारा पेशाब करने का वीडियो सामने आया था। वीडियो में प्रवेश शुक्ला नाम का व्यक्ति आदिवासी युवक के साथ अपमानजनक व्यवहार करते हुए दिखा। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और मामला सीधी पेशाब कांड के नाम से देशभर में चर्चित हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद सीधी पुलिस ने आरोपी प्रवेश शुक्ला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की आपराधिक धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। इस आपत्तिजनक कृत्य को देखते हुए पुलिस ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई शुरू की।
तत्कालीन मुख्यमंत्री की पहल और मुआवजा
घटना पर देशव्यापी आक्रोश के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित युवक को भोपाल स्थित सीएम हाउस बुलाया था। वहां उन्होंने पीड़ित के पैर धोकर सार्वजनिक रूप से क्षमा जताई और राज्य सरकार की ओर से 6.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की गई।
विधायक प्रतिनिधि को लेकर उठे सवाल
मामले की शुरुआत में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि प्रवेश शुक्ला सीधी के भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के प्रतिनिधि हैं। प्रवेश के पिता रामाकांत शुक्ला ने भी कहा था कि उनका बेटा विधायक प्रतिनिधि रहा है और इसी कारण विपक्ष उनका विरोध कर रहा है।
हालांकि, विधायक केदारनाथ शुक्ला ने इन दावों से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रवेश न तो उनका प्रतिनिधि है और न ही भाजपा का कार्यकर्ता, हालांकि वे उसे जानते हैं क्योंकि दोनों सीधी क्षेत्र से हैं। सोशल मीडिया पर दोनों की कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिन पर शुक्ला ने कहा था कि लोग अक्सर तस्वीरों में साथ खड़े दिख जाते हैं, इसका अर्थ यह नहीं कि वे उनके प्रतिनिधि हैं।
विवाद और आगे की राजनीति
सीधी पेशाब कांड के बाद से ही इस मामले को लेकर राजनीतिक तकरार जारी है। टिकट कटने के बाद केदारनाथ शुक्ला अब खुलकर इसे षड्यंत्र बता रहे हैं, जबकि भाजपा सांसद राजेश मिश्रा ने प्रमाण की मांग कर आरोपों से दूरी बना ली है। आने वाले समय में पार्टी संगठन के निर्णय और शुक्ला की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Satyam Tripathi