राजस्थान में खांसी की सिरप से मासूमों की मौत का बढ़ता सिलसिला
राजस्थान में खांसी की सिरप पीकर बच्चों की मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में चूरू जिले के 6 वर्षीय अनस ने जयपुर के जेके लोन अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिजनों का दावा है कि सरकारी हॉस्पिटल से दी गई सिरप पीने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। इससे पहले भरतपुर और सीकर में भी इसी तरह के मामले सामने आए थे।
भरतपुर और सीकर में पहले सामने आए मामले
18 सितंबर को भरतपुर के मलाह गांव में दो बच्चों ने सरकारी हॉस्पिटल से दी गई खांसी की सिरप पी थी। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। इनमें से एक बच्चे, सम्राट, को जयपुर के जेके लोन अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उसकी 22 सितंबर को मौत हो गई। इसी तरह 29 सितंबर को सीकर के 5 वर्षीय नितियांस शर्मा की खांसी की सिरप पीने के बाद मौत हो गई। परिजनों ने दावा किया कि यह दवा सरकारी निशुल्क दवा योजना के तहत मिली थी।
चूरू में चौथा मामला
चूरू के वार्ड-39 के अनस की तबीयत बिगड़ने पर उसे चूरू हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, और तीन दिन बाद जयपुर के जेके लोन अस्पताल में रेफर किया गया। परिजनों ने बताया कि उन्होंने 4 दिन पहले उसे खांसी की सिरप दी थी। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने बच्चे की मौत का कारण दिमागी बुखार बताया।
सरकार ने दावों को बेबुनियाद बताया
राजस्थान सरकार ने इन मौतों के पीछे खांसी की सिरप को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों को खारिज कर दिया है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि दवा की दो बार जांच करवाई गई है, और अब एक और कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिरप पीने से मौतें नहीं हुई हैं।
तमिलनाडु में जहरीली सिरप का खुलासा
तमिलनाडु सरकार ने एक जांच में पाया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 48.6% जहरीले डाईथाइलीन ग्लॉयकाल की मिलावट थी। इस सिरप के कारण मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 10 बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने सिरप के प्रोडक्शन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।
निष्कर्ष
राजस्थान में खांसी की सिरप से मौतों का मामला गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हालांकि, सरकार द्वारा दवा को सुरक्षित बताते हुए जांच रिपोर्ट पेश की गई है। यह जरूरी है कि इन मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।