महाकालेश्वर मंदिर में 3 नवंबर को दो सवारियों का आयोजन
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में इस बार कार्तिक मास में 3 नवंबर को भगवान महाकाल की दो सवारियां नगर भ्रमण के लिए निकलेंगी। यह आयोजन मंदिर परंपरा के अनुसार किया जा रहा है। इन सवारियों का आयोजन श्रावण-भादौ के अलावा कार्तिक और अगहन महीनों में भी होता है।
कार्तिक मास की सवारी का समय और मार्ग
3 नवंबर को पहली सवारी शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से शुरू होगी। यह सवारी परंपरागत मार्ग से शिप्रा तट तक जाएगी और वहां दर्शन के बाद शाम 7 बजे तक मंदिर लौटेगी। इस सवारी को देखने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या जुटने की संभावना है।
हरिहर भेंट सवारी का आयोजन
इसी दिन रात 11 बजे भगवान महाकाल पालकी में सवार होकर वैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर हरिहर मिलन के लिए महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर तक जाएंगे। यह सवारी देर रात को महाकाल मंदिर वापस लौटेगी। सोम प्रदोष के संयोग से इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
कार्तिक और अगहन में पांच सवारियों का कार्यक्रम
इस वर्ष कार्तिक और अगहन मास में बाबा महाकाल की कुल पांच सवारियां निकलेंगी। कार्तिक की प्रथम सवारी सोमवार 27 अक्टूबर को निकाली गई थी। दूसरी सवारी 3 नवंबर को होगी, जिसमें हरिहर मिलन की रात की सवारी भी शामिल है। इसके बाद अगहन मास में तृतीय सवारी 10 नवंबर को और चौथी राजसी सवारी 17 नवंबर को निकाली जाएगी। सभी सवारियां सोमवार को ही आयोजित होंगी, जो महाकाल मंदिर की एक स्थापित परंपरा है।
समापन
महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाली इन सवारियों का श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व है। यह आयोजन धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं को आगे बढ़ाने का एक अहम माध्यम है। इस वर्ष की सवारियां भी बड़ी संख्या में भक्तों को जोड़ने का काम करेंगी।