RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सुझाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पानीपत में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और नेपाल में नई सरकारों के गठन के बाद इन देशों में शांति-स्थिरता और उनके भारत के साथ अच्छे संबंध पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर अपनी चिंता भी व्यक्त की।
बांग्लादेश और नेपाल से संबंध सुधारने का सुझाव
होसबाले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि संघ का यह कहना बिल्कुल नहीं है कि केवल RSS के कार्यकर्ता ही देशभक्त हैं। संघ की इस सभा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सुझाव रखे गए, जिनमें पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से संबंध सुधारने का सुझाव भी शामिल था।
RSS के शताब्दी वर्ष की रिपोर्ट और नए मुख्यालय की तैयारी
सभा के दौरान आरएसएस के शताब्दी वर्ष (2025-26) की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट में केरल और तमिलनाडु समेत दक्षिण के राज्यों तथा पूर्वोत्तर में संघ की गतिविधियों और चुनौतियों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एक वर्ष में देश में संघ की 88,949 शाखाएं लगाई गईं, जो पिछले साल से 5,820 अधिक हैं। इस सभा में संघ उत्तर भारत में एक समानांतर मुख्यालय बनाने की तैयारी पर भी विचार कर रहा है। हरियाणा के पानीपत में माधव सृष्टि साधना केंद्र को नागपुर मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे यह उत्तर भारतीय राज्यों के लिए एक रणनीतिक केंद्र बन सके।
BJP के कमजोर राज्यों पर विशेष ध्यान
आरएसएस की प्रतिनिधि सभा में उन राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जहां भाजपा की उपस्थिति कमजोर है या वह कभी सत्ता में नहीं रही। संघ के शीर्ष नेतृत्व ने अगले दो वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल पर मुख्य ध्यान देने का निर्णय लिया है। इन राज्यों में संघ अपने कार्य विस्तार के लिए सूक्ष्म-प्रबंधन और नए सांगठनिक ढांचे पर जोर दे रहा है।
पंजाब में राष्ट्रीय सिख संगत को सक्रिय करने की रणनीति
पंजाब को आरएसएस एक चुनौती के रूप में देख रहा है, जहाँ भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती। राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए, संघ राष्ट्रीय सिख संगत को नए सिरे से सक्रिय करेगा। संघ यह संदेश देना चाहता है कि सिखों और हिंदुओं का रिश्ता 'नख-मांस' जैसा है।
तीन दिवसीय इस सभा के अंतिम दिन, संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ के ढांचागत बदलावों और अगले एक साल के कार्यों के लिए सभा से स्वीकृति लेंगे। इस सभा में आरएसएस की विचारधारा से जुड़े 32 संगठनों ने सुझाव दिए और 1487 पदाधिकारियों ने भाग लिया।
Sharad Shrivastava