इबोला वायरस की वैक्सीन तैयार! रूस का बड़ा दावा, WHO ने की अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा
दुनिया भर में इबोला वायरस का डर बना हुआ है, खासकर अफ्रीकी देशों में इसकी स्थिति गंभीर है। सेंट्रल एशिया में अब तक 241 लोगों की मौत हो चुकी है। यह वायरस कोरोना की तरह तेजी से फैल रहा है, लेकिन इसका मृत्यु दर 50% तक है, जो कोरोना के 2% से कहीं अधिक है।
रूस का दावा: इबोला की नई वैक्सीन विकसित
रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के एक नए स्ट्रेन, Bundibugyo (बंडिबुग्यो) के खिलाफ एक वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। यह वैक्सीन विशेष रूप से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैल रहे इस स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम बताई जा रही है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने इस वैक्सीन की घोषणा की, जिसकी पुष्टि दक्षिण अफ्रीका में स्थित रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया पर की। हालांकि, यह वैक्सीन कब तक उपलब्ध होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
Bundibugyo स्ट्रेन: एक दुर्लभ और खतरनाक रूप
इबोला एक वायरल हेमोरेजिक फीवर है जो विभिन्न स्ट्रेन्स के माध्यम से फैलता है। Bundibugyo स्ट्रेन को इबोला के सबसे दुर्लभ और खतरनाक रूपों में से एक माना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ, दूषित सतहों या संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है। इसकी मृत्यु दर भी काफी अधिक है।
फिलहाल, Bundibugyo स्ट्रेन के लिए कोई आधिकारिक तौर पर स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। रूस द्वारा इस नई वैक्सीन के विकास का दावा दुनिया के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और अंतरराष्ट्रीय मंजूरी के लिए और अधिक वैज्ञानिक परीक्षणों की आवश्यकता होगी।
अफ्रीका में इबोला का बढ़ता प्रकोप
अफ्रीकी देशों, विशेषकर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला के विभिन्न स्ट्रेन्स के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इन देशों में वायरस तेजी से फैल रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ गया है।
WHO ने घोषित की अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल (PHEIC)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को DRC और युगांडा में इबोला के प्रकोप को Public Health Emergency of International Concern-PHEIC घोषित किया है। यह घोषणा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (IHR), 2005 के तहत की गई है, जिसका अर्थ है कि WHO इस स्थिति को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा मान रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, DRC और युगांडा के पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक है। विशेष रूप से दक्षिण सूडान जैसे देशों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।
भारत फिलहाल इबोला के खतरे से बाहर है। 27 मई को युगांडा से बेंगलुरु आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण दिखे थे, जिसके बाद उसे क्वारंटाइन कर दिया गया था। शुरुआती जांच में उसमें इबोला वायरस नहीं मिला है, लेकिन आगे की जांच के लिए सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं।
Sharad Shrivastava