मॉडर्न पेंटाथलॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप में इंदौर की भूमि अग्रवाल ने रचा इतिहास
इंदौर की खिलाड़ी भूमि अग्रवाल ने साउथ अफ्रीका में आयोजित मॉडर्न पेंटाथलॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार पदक जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वह एक ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चार पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी बन गईं और अंडर-21 वर्ग में देश को पहली बार स्वर्ण पदक दिलाया।
पहली अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में चार पदक
भूमि ने अपने करियर की पहली अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में ही व्यक्तिगत बायथल इवेंट में स्वर्ण पदक, ट्राइथल में रजत पदक, जबकि बायथल मिक्स्ड रिले और ट्राइथल मिक्स्ड रिले में कांस्य पदक जीते। चैंपियनशिप में कुल 29 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
कठिन और तकनीकी माने जाते हैं बायथल और ट्रायथल
मॉडर्न पेंटाथलॉन को अन्य खेलों की तुलना में अधिक कठिन और तकनीकी माना जाता है। बायथल इवेंट में खिलाड़ियों को पहले 800 मीटर दौड़, फिर 100 मीटर तैराकी और इसके बाद दोबारा 800 मीटर दौड़ पूरी करनी होती है। ट्रायथल इवेंट में स्विमिंग, साइक्लिंग और रनिंग शामिल रहती है, जो खिलाड़ियों की सहनशक्ति और कौशल की कड़ी परीक्षा लेते हैं।
नेशनल से इंटरनेशनल मंच तक का सफर
भूमि शिशुकुंज स्विमिंग एकेडमी से जुड़ी हैं। उन्होंने इंदौर में आयोजित नेशनल बायथल प्रतियोगिता में स्वर्ण और रजत पदक जीते थे। इन्हीं राष्ट्रीय प्रदर्शन के आधार पर उन्हें मॉडर्न पेंटाथलॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चयनित किया गया।
भारत के लिए पहला स्वर्ण और चार पदक
भूमि के अनुसार इस चैंपियनशिप में भारत को पहले वर्ष 2013 में केवल कांस्य पदक मिला था। इस बार उन्होंने न केवल भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया, बल्कि कुल चार पदक जीतकर देश के लिए नया इतिहास रच दिया।
रेत में दौड़ और ओपन वाटर स्विमिंग बनी बड़ी चुनौती
भूमि ने बताया कि मुकाबले बेहद कठिन थे। उन्हें रेत में दौड़ लगानी पड़ी, साथ ही ओपन वाटर में तैरना पड़ा। बारिश होने से लहरें तेज हो जाती थीं, जिससे तैराकी और चुनौतीपूर्ण हो जाती थी। उन्होंने इन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार किया और बेहतर प्रदर्शन किया।
परिवार और कोच का सहयोग, अब लक्ष्य एशियन गेम्स
भूमि अब एशियन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि परिवार के सहयोग से संभव हो सकी। एक समय ऐसा भी आया जब वे हार मानने वाली थीं, लेकिन माता-पिता ने उनका मनोबल बढ़ाया। उनके कोच आकाश, अंकित और वेदांत ने भी विशेष मार्गदर्शन और सहयोग दिया।
भूमि का संदेश: कभी हार मत मानो
भूमि का मानना है कि कठिन हालात में भी हार नहीं माननी चाहिए। उनका संदेश है कि एक रेस किसी भी खिलाड़ी की पूरी जिंदगी बदल सकती है, इसलिए आखिरी तक प्रयास जारी रखना जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर परिवार को निराशा
भूमि की मां मेघा और पिता गोविंद अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करेगी। भूमि पढ़ाई में भी हमेशा 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाती रही हैं। परिवार को इस बात का अफसोस है कि इतनी बड़ी सफलता के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि ने उन्हें आकर बधाई या आशीर्वाद तक नहीं दिया, जबकि उसी दिन मुख्यमंत्री सहित कई नेता इंदौर में मौजूद थे।
Sachin Saxena