शिक्षक पात्रता परीक्षा: आवेदन तिथि बढ़ेगी, परीक्षा ऑफलाइन और ऑब्जेक्टिव होगी
आवेदन तिथि में वृद्धि और परीक्षा प्रारूप
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा के ऑनलाइन फॉर्म भरने की तारीख एक बार फिर बढ़ने वाली है। वर्तमान में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 18 सितंबर है, जिसे पहले 4 सितंबर से बढ़ाकर 18 सितंबर किया गया था। अब माध्यमिक शिक्षा मंडल के नई परीक्षा एजेंसी बनने के बाद आवेदन तिथि में और वृद्धि होगी। यह वृद्धि एक हफ्ते या 15 दिन तक होगी, इसका फैसला एक-दो दिनों में हो जाएगा। परीक्षा पूरी तरह ऑफलाइन होगी और वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव टाइप) सवालों के जरिये शिक्षकों का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा केंद्र शिक्षकों के फॉर्म भरने की संख्या के आधार पर तय किए जाएंगे। अधिक आवेदक होने पर केंद्रों की संख्या बढ़ेगी, अन्यथा सीमित केंद्र रहेंगे। शिक्षकों को कम से कम दूरी वाले परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराए जाएंगे।
परीक्षा एजेंसी परिवर्तन और तैयारियां
राज्य सरकार द्वारा शिक्षक संगठनों की मांग पर परीक्षा ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कराने के निर्णय के बाद कर्मचारी चयन मंडल ने एक हफ्ते पहले परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने परीक्षा का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी। अब माशिमं का परीक्षा एजेंसी बनना तय हो गया है। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा वसूली जा रही फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल को ट्रांसफर कर दी जाएगी। माशिमं अब परीक्षा की तैयारियों में जुट गया है और जल्दी ही परीक्षा कराने का प्लान तैयार कर प्रश्न-पत्रों की छपाई की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा अलग-अलग होगी। लोक शिक्षण संचालनालय और माशिमं के बीच संवाद के बाद माशिमं अपना प्लान तैयार कर रहा है, जिसके बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी।
दूसरी ओर, अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से उत्पन्न कठिनाइयों के निराकरण की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। खंडेलवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, बैतूल द्वारा ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न कठिनाइयों से उन्हें अवगत कराया गया है। पत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई एक्ट) के प्रावधानों के संदर्भ में अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े विषय का उल्लेख करते हुए शासन स्तर पर उचित निर्णय की आवश्यकता बताई गई है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस विषय पर प्रदेश स्तर पर उचित निर्णय लेते हुए अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों की कठिनाइयों का निराकरण किया जाए।
Amit Pateria