मध्य प्रदेश में बारिश की वर्तमान स्थिति और आगामी पूर्वानुमान
बुधवार शाम करीब 7 बजे भोपाल में गरज, चमक और हवा के साथ तेज बारिश हुई। दिन भर धूप खिली रही लेकिन शाम होते ही मौसम अचानक बदल गया। सीहोर में रात 8:30 बजे से तेज बारिश शुरू हो गई।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होगा। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो प्रदेश की बारिश का कोटा पूरा हो सकता है। सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच के मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिरा है, यानी कोटे के बराबर पहुंचने के लिए 4.3 इंच बारिश और चाहिए। मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है, हालांकि कई बार अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में मानसून विदा होता है। इस बार सितंबर अंत में विदाई की शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञ ने बताया कि 17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि अधिक व्यापक होने की संभावना है, जबकि 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में लो प्रेशर एरिया सक्रिय रहा और मानसून ट्रफ की गतिविधि भी दिखी, लेकिन प्रदेश के किसी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन में धूप खिली रही।
मानसूनी सीजन में अब 14 दिन शेष हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी 88.5% बारिश दर्ज हुई है। 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया। इन जिलों में अब जो बारिश होगी वह बोनस मानी जाएगी। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% अधिक पानी गिर चुका है।
मौसम विभाग के अनुसार जून में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश से आंकड़े सुधरे, लेकिन मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन बारिश नहीं हुई। जुलाई अंत में फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ, फिर भी जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। इस कारण अब तक प्रदेश में सामान्य से 6% कम बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।
भोपाल में सितंबर की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से अधिक पानी बरस रहा है। 1961 में पूरे सितंबर में 30 इंच से अधिक पानी गिरा था। 2 सितंबर 1947 को 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है, दिन का तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम 22.2 डिग्री सेल्सियस रहता है। इंदौर में सितंबर महीने का रिकॉर्ड 30 इंच बारिश का है जो 1954 में बना। 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिरा। औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या अधिक दिन बारिश संभव है। ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई, यह मासिक रिकॉर्ड है। 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश दर्ज हुई। सितंबर औसत करीब 6 इंच है, पिछले 4 साल से अधिक बारिश हो रही है। इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। जबलपुर में 20 सितंबर 1926 को 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, उसी साल पूरे महीने में 32 इंच बारिश हुई। औसत 10 दिन बारिश होती है, सामान्य साढ़े 8 इंच है, पिछले 3 साल से सामान्य से अधिक पानी गिर रहा है। उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन का कोटा पूरा कर दिया था। उस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा। 27 सितंबर 1961 को 24 घंटे में साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना। सितंबर औसत पौने 7 इंच है, पिछले 2 साल से 12 इंच से अधिक बारिश हो रही है, औसत 7 दिन बारिश होती है।
Sharad Shrivastava