शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार के भ्रष्टाचार की जांच का ऐलान, मानदेय बंद

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शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार के भ्रष्टाचार की जांच का ऐलान, मानदेय बंद

पश्चिम बंगाल में बड़े प्रशासनिक फैसले: भ्रष्टाचार की जांच, मानदेय बंद और नई योजनाएं

भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न की जांच के लिए दो आयोगों का गठन

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक में ममता सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के मामलों की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो अलग-अलग आयोग बनाए जाएंगे, जिनकी अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे। एक आयोग संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच करेगा, जिसमें सरकारी योजनाओं, निर्माण कार्यों और सेवा वितरण में कथित घोटालों, कटमनी, रिश्वतखोरी और सरकारी फंड की गड़बड़ी शामिल होगी। दूसरा आयोग महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार के मामलों की जांच करेगा, जिसमें अल्पसंख्यक, एससी-एसटी समुदाय से जुड़े मामले भी शामिल होंगे।

धार्मिक मानदेय बंद, < kadınların > लिए नई < योजनाएं >

सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले धार्मिक आधार पर सरकारी मानदेय को 1 जून से बंद करने का फैसला किया है। पहले इमामों को 3000 रुपए और मुअज्जिन-पुजारियों को 2000 रुपए मासिक सहायता दी जाती थी। इसके स्थान पर, सरकार ने 'अन्नपूर्णा योजना' को मंजूरी दी है, जिसके तहत 1 जून से महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। लक्ष्मी भंडार योजना की मौजूदा लाभार्थियों को बिना दोबारा आवेदन किए इसका लाभ मिलेगा। साथ ही, महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी 1 जून से शुरू होगी।

सरकारी नौकरियों में < आयु सीमा > बढ़ी, < 7वें वेतन आयोग > को मंजूरी

राज्य सरकार की नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी की गई है। नई व्यवस्था के तहत ग्रुप A पदों के लिए 41 साल, ग्रुप B के लिए 44 साल और ग्रुप C-D के लिए 45 साल की उम्र सीमा निर्धारित की गई है, जो 11 मई से लागू होगी। एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलने वाली अतिरिक्त आयु छूट पहले की तरह जारी रहेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन संशोधन के लिए 7वें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है।

< OBC > सूची रद्द, नई सूची के लिए पैनल बनेगा

कैबिनेट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 2024 के फैसले के आधार पर मौजूदा OBC सूची को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह फैसला 77 समुदायों को OBC सूची में शामिल करने को लेकर उठे विवाद के बाद आया है, जिनमें 75 मुस्लिम समुदाय शामिल थे। हाईकोर्ट ने 2010 के बाद जारी करीब 5 लाख OBC प्रमाणपत्रों को अमान्य कर दिया था। अब सरकार नई OBC सूची तैयार करने और आरक्षण पात्रता तय करने के लिए एक अलग पैनल बनाएगी।

Amit Pateria