सीएम हेल्पलाइन पर 2.59 लाख शिकायतें, 87% लोग असंतुष्ट, सभी जिले डी रेटिंग

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सीएम हेल्पलाइन पर 2.59 लाख शिकायतें, 87% लोग असंतुष्ट, सभी जिले डी रेटिंग

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों का अंबार, निपटारे की गुणवत्ता पर सवाल

मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत निवारण व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। मुख्य सचिव की 21 जनवरी की कलेक्टर–एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हुए रिव्यू में खुलासा हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों की शिकायतों की सुनवाई समय पर और संतोषजनक तरीके से नहीं हो रही है।

23 दिन में 2.59 लाख शिकायतें, बड़ी संख्या में लंबित

1 से 23 जनवरी के बीच प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन पर कुल 2,59,479 शिकायतें दर्ज हुईं। आंकड़ों के अनुसार करीब 87 प्रतिशत मामलों में शिकायतकर्ता निपटारे से संतुष्ट नहीं हैं। लगभग 12.54 प्रतिशत शिकायतें 50 दिन से अधिक समय से लंबित हैं, यानी हर आठवीं शिकायत 50 दिनों से ज्यादा पुरानी है।

इसके अलावा 9.83 प्रतिशत शिकायतों को निम्न गुणवत्ता के साथ बंद किया गया, जिससे निपटारे की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नॉन-अटेंडेंट श्रेणी में 25,811 शिकायतें दर्ज हैं, जो यह दिखाती हैं कि इन मामलों में या तो शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया या फील्ड स्तर पर आवश्यक कार्रवाई ही नहीं हुई।

सभी जिले डी रेटिंग में, कई जिलों में शिकायतों की संख्या ज्यादा

शिकायतों के निराकरण की रेटिंग में प्रदेश के सभी जिले डी श्रेणी में दर्ज हुए हैं। महानगरों को छोड़कर सबसे ज्यादा शिकायतें मुरैना में 8,112, सागर में 8,022, शिवपुरी में 7,662, छतरपुर में 6,837, राजगढ़ में 6,777 और भिंड में 6,473 दर्ज की गई हैं।

इसके अलावा विदिशा में 5,941, उज्जैन में 5,840, गुना में 5,464, रायसेन में 5,409 और टीकमगढ़ में 5,257 शिकायतें दर्ज हुई हैं। अपेक्षाकृत कम शिकायतों वाले जिलों में अलीराजपुर में 338, बुरहानपुर में 1,223, हरदा में 1,749, आगर मालवा में 1,998, नीमच में 2,386, श्योपुर में 2,457 और शाजापुर में 2,950 शिकायतें दर्ज हुईं।

इसी तरह खंडवा में 3,200, दतिया में 3,611, धार में 3,737, नर्मदापुरम में 4,063, देवास में 4,163 और सीहोर में 4,501 शिकायतें सामने आईं।

1.74 लाख से अधिक शिकायतें 100 दिन से ज्यादा समय से लंबित

आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि प्रदेश में 1.74 लाख से ज्यादा शिकायतें 100 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामलों से यह संकेत मिलता है कि शिकायत निवारण की गति और तंत्र, दोनों ही अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।

विभागवार स्थिति: राजस्व में सबसे ज्यादा शिकायतें, ऊर्जा विभाग अपेक्षाकृत बेहतर

दिसंबर माह के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व विभाग में दर्ज हुईं। यहां कुल 61,685 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से केवल 37 प्रतिशत मामलों में ही शिकायतकर्ताओं ने निपटारे पर संतुष्टि जाहिर की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 57,734 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 39 प्रतिशत शिकायतें संतुष्टि के साथ बंद की गईं।

वहीं ऊर्जा विभाग में 42,462 शिकायतें दर्ज हुईं और इनमें से 60 प्रतिशत मामलों में शिकायतकर्ताओं ने निपटारे पर संतुष्टि जताई। प्रमुख विभागों में ऊर्जा विभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है।

निष्कर्ष: शिकायत तंत्र की प्रभावशीलता पर उठे प्रश्न

रिव्यू मीटिंग में सामने आए इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत निवारण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लंबित, निम्न गुणवत्ता से बंद और नॉन-अटेंडेंट शिकायतों ने प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Arvind Vishwakarma