सिंहस्थ से पहले उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा फोरलेन हाईवे, केंद्र से मंजूरी

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सिंहस्थ से पहले  उज्जैन  को  दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे  से जोड़ेगा फोरलेन हाईवे,  केंद्र  से मंजूरी

उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले फोरलेन हाईवे को केंद्र की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 4-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर कुल 3839 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। अधिकारियों के अनुसार, यह देश में अब तक की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली परियोजनाओं में से एक है, जिसकी फाइल देश में सबसे तेज दौड़ी।

मुख्य सचिव अनुराग जैन की पहल पर इसे मई 2025 में नेशनल हाईवे घोषित किया गया था। इसके बाद छह महीने के भीतर इसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की गई। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी तीन महीने में इस स्थिति तक लाया गया है कि बुधवार से मुआवजा वितरण प्रारंभ हो जाएगा, और 17 मार्च को इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। परियोजना पर काम अप्रैल 2026 में शुरू होने की उम्मीद है और मार्च 2028 से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस तेजी का मुख्य कारण आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला बताया जा रहा है।

NH-752D के बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन की लंबाई 80.45 किलोमीटर है। वर्तमान में यह सड़क लगभग 5.5 मीटर चौड़ी है, जो टू-लेन से भी कम है, और वाहनों की गति 20-50 किमी प्रति घंटा तक सीमित रहती है। 4-लेन में अपग्रेड होने के बाद यहां 80-100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से यातायात संभव होगा, जिससे सफर में डेढ़ से दो घंटे की कमी आएगी। यह नया कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने के लिए सबसे छोटा मार्ग साबित होगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, यह ग्रीन फील्ड फोरलेन रोड धार के पीएम-मित्र पार्क से होकर गुजरेगा, जिससे उद्योगों को भी गति मिलेगी तथा इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास के औद्योगिक क्षेत्रों से माल ढुलाई की लागत कम होगी।

चीन सहित सीमावर्ती देशों के लिए FDI नियमों में ढील

केंद्र सरकार ने मंगलवार को भारत की जमीनी सीमा से जुड़े चीन सहित अन्य सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में छूट प्रदान की है। इन देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान भी शामिल हैं।

संशोधित नियमों के तहत, यदि इन देशों के निवेशकों की किसी विदेशी कंपनी में अधिकतम 10% हिस्सेदारी है, तो वह कंपनी अब भारत में बिना सरकारी मंजूरी के निवेश कर सकेगी। पहले, यदि किसी विदेशी कंपनी में इन देशों के निवेशक का एक भी शेयर होता था, तो उसे भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिए सरकार से मंजूरी लेनी अनिवार्य होती थी। हालांकि, एफडीआई के अन्य नियम, जैसे सेक्टोरल कैप और एंट्री रूट, पहले की तरह ही लागू रहेंगे। यह फैसला पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया और 2020 के प्रेस नोट 3 में संशोधन के माध्यम से किया गया, जिसे कोविड-19 के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए लाया गया था।

Amit Pateria