सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स पर सरकार देगी मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार को निर्देश दिया कि वह वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स से होने वाले नुकसान का मुआवजा दे। कोर्ट ने इसके लिए एक 'नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी' बनाने को कहा है। इस पॉलिसी के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो।
टीकाकरण साइड इफेक्ट्स की निगरानी और याचिकाओं का आधार
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा और इसके लिए अलग से किसी एक्सपर्ट पैनल के गठन की आवश्यकता नहीं है। यह फैसला रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।
याचिकाकर्ताओं में से एक, वेणुगोपाल गोविंदन का दावा था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के महीने भर बाद मृत्यु हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले पर बनी कोवीशील्ड को लेकर एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स की बात स्वीकार की थी। हालांकि, करुण्या के मामले में गठित राष्ट्रीय समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि वैक्सीन से मौत के पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे। एक अन्य मामले में, 8 साल की श्री ओमत्री की मई 2021 में कोवीशील्ड की पहली खुराक के बाद थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) से मौत हो गई थी। परिवार को RTI के माध्यम से इस बात का पता चला था।
इससे पहले, सरकार ने 2022 में जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि वैक्सीन स्वेच्छा से लगवाई जाती है और यह लोगों द्वारा जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।
ICMR की स्टडी और भारतीय वैक्सीन
जुलाई 2025 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया था कि देश में 18 से 45 साल के लोगों की हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। इस स्टडी में कहा गया था कि भारत की कोविड वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी हैं, और इनसे होने वाले गंभीर साइड इफेक्ट के मामले दुर्लभ हैं। स्टडी ने अचानक हुई मौतों की अन्य संभावित वजहों में जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल किए थे। भारत में दो प्रमुख कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं: भारत बायोटेक द्वारा ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड।
Sachin Saxena