सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगाई

· 1 min read
सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगाई

उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व बीजेपी विधायक और रेपिस्ट कुलदीप सिंह सेंगर को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के जमानत आदेश को निलंबित करते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया और उससे जवाब मांग लिया।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर को जमानत दी थी। इसके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मामले पर सुनवाई की और दोनों पक्षों की करीब 40 मिनट तक दलीलें सुनीं।

बेंच ने कहा कि सामान्यतः किसी दोषी या विचाराधीन कैदी को रिहा करने वाले आदेश पर, उसे सुने बिना, रोक नहीं लगाई जाती। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में परिस्थितियां अलग हैं, क्योंकि आरोपी पहले से ही दूसरे मामले में दोषी करार दिया जा चुका है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी।

गंभीर कानूनी सवालों पर विचार की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले में अहम और गंभीर कानूनी सवाल हैं, जिन पर विस्तार से विचार करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाईकोर्ट का आदेश देने वाले जज देश के बेहतरीन जजों में गिने जाते हैं, लेकिन गलती किसी से भी हो सकती है।

एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर अदालत ने टिप्पणी की कि कैसे पॉक्सो कानून के तहत एक पुलिस कॉन्स्टेबल को लोक सेवक माना जा सकता है, जबकि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि जैसे विधायक या सांसद को इस दायरे से बाहर रखा जाए। अदालत ने कहा कि यह असमानता उसे परेशान कर रही है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी ने यह सवाल उठाया कि क्या हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपी धारा 376(2)(i) के तहत दोषी है या नहीं। इस पर वरिष्ठ वकील हरिहरन ने तर्क दिया कि किसी एक कानून में, दूसरे कानून से परिभाषा उधार लेकर लागू नहीं की जा सकती।

सरकार की दलील: यह भयावह मामला, सख्त सजा का प्रावधान

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह एक भयावह मामला है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो कानून के तहत आरोप तय किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा 20 साल की कैद होती है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।

आगे की प्रक्रिया और अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में उठ रहे कानूनी प्रश्नों पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की गई है, जिसमें जमानत और संबंधित कानूनी मुद्दों पर विस्तार से बहस की जाएगी।

उन्नाव गैंगरेप केस से जुड़े बिंदुओं और सुनवाई के ताजा अपडेट के लिए विस्तृत जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जा रही है।

Janmejay Chaturvedi