ललित मोदी ने वायरल वीडियो पर भारत सरकार से मांगी माफी

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ललित मोदी ने वायरल वीडियो पर भारत सरकार से मांगी माफी

ललित मोदी ने वायरल वीडियो पर भारत सरकार से माफी मांगी

आर्थिक मामलों में विवादों से घिरे पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। इस वीडियो में उन्होंने खुद को और कारोबारी विजय माल्या को भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े कहा था, जिसे लेकर सवाल उठे थे।

वायरल वीडियो और उस पर उठे सवाल

22 दिसंबर को ललित मोदी और विजय माल्या का एक वीडियो सामने आया था। यह वीडियो माल्या के जन्मदिन के जश्न का बताया गया, जिसमें दोनों एक साथ दिखाई दे रहे थे। ललित मोदी इस वीडियो में मजाकिया अंदाज में खुद को और विजय माल्या को भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े कहते नजर आए।

इस वीडियो को ललित मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि वे एक बार फिर इंटरनेट को हिलाकर रख देंगे, खास तौर पर मीडिया के लिए, और लोगों से इसे जलन के साथ देखने को कहा था। वीडियो में विजय माल्या अपनी पार्टनर पिंकी लालवानी के साथ मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे थे।

ललित मोदी की सफाई और माफी

वीडियो पर प्रतिक्रियाएं तेज होने के बाद ललित मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हों, खासकर भारत सरकार की, तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बयान का आशय वैसा नहीं था, जैसा उसे समझा गया। उन्होंने किसी भी प्रकार की गलतफहमी के लिए दोबारा माफी मांगते हुए अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश की।

विजय माल्या के खिलाफ कानूनी लड़ाई

विजय माल्या 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं और वर्ष 2019 में उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। उनके खिलाफ भारत में बैंकों की भारी देनदारी और आर्थिक अनियमितताओं के मामले चल रहे हैं।

हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में माल्या की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने खुद को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने वाले आदेश को चुनौती दी है। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने यह टिप्पणी की कि माल्या इस समय भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, ऐसे में उनकी याचिका पर विधिक रूप से सुनवाई करना मुश्किल है।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि कोई व्यक्ति विदेश में बैठकर भारतीय कानून को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। माल्या के वकीलों ने यह दलील रखी कि बैंकों की अधिकांश वित्तीय देनदारी वसूल की जा चुकी है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक जिम्मेदारी केवल अदालत के सामने पेश हुए बिना समाप्त नहीं की जा सकती। इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है।

ललित मोदी पर लगे आरोप और देश छोड़ने की पृष्ठभूमि

ललित मोदी 2005 से 2009 तक राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे और 2008 में उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत में मुख्य भूमिका निभाई। इसके बाद बीसीसीआई ने उन्हें आईपीएल का चेयरमैन और कमिश्नर बनाया।

2010 में आईपीएल से जुड़े कई वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठे और ललित मोदी पर भ्रष्टाचार, कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे। आरोपों के अनुसार, उन्होंने मॉरीशस की कंपनी वर्ल्ड स्पोर्ट्स को 425 करोड़ रुपये का ठेका दिया और इस सौदे से लगभग 125 करोड़ रुपये कमीशन लेने के आरोप सामने आए। साथ ही, दो नई टीमों की नीलामी के दौरान भी अनियमितताओं के दावे किए गए।

इन्हीं आरोपों के बाद 2010 में आईपीएल के तीसरे सीजन के फाइनल के तुरंत बाद बीसीसीआई ने ललित मोदी को निलंबित कर दिया। उसी वर्ष उन्होंने अंडरवर्ल्ड से जान से मारने की धमकियों का हवाला देते हुए भारत छोड़कर लंदन का रुख किया। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया और उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया।

मामले का व्यापक प्रभाव और निष्कर्ष

ललित मोदी और विजय माल्या दोनों भारत की वित्तीय और कानूनी व्यवस्था में लंबे समय से विवाद और चर्चा का विषय रहे हैं। एक ओर माल्या पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है, वहीं दूसरी ओर ललित मोदी पर आईपीएल से जुड़े कई वित्तीय अनियमितताओं के मामले लंबित हैं।

ऐसे में दोनों का एक साथ वीडियो में नजर आना और खुद को देश के बड़े भगोड़ों के रूप में पेश करना सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का मुद्दा बन गया। आलोचना बढ़ने के बाद ललित मोदी की ओर से आई माफी यह संकेत देती है कि मामले की संवेदनशीलता और कानूनी पृष्ठभूमि को लेकर वे दबाव में हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय एजेंसियां प्रत्यर्पण और कानूनी प्रक्रिया के जरिए इन मामलों को किस तरह अंजाम तक पहुंचाती हैं और अदालतें आगे क्या रुख अपनाती हैं।

Sachin Saxena