तमिलनाडु सरकार हिंदी पर बैन लगाने की तैयारी
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) सरकार हिंदी भाषा के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बुधवार को विधानसभा में एक बिल पेश कर सकती है। यह बिल राज्य में हिंदी होर्डिंग्स, बोर्ड, फिल्मों और गानों पर बैन लगाने से संबंधित है। मंगलवार रात इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक आपातकालीन बैठक भी आयोजित की गई थी।
हिंदी थोपने पर CM स्टालिन का विरोध
तमिलनाडु की सरकार और केंद्र के बीच हिंदी भाषा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हिंदी को थोपे जाने का विरोध करते हुए राज्य की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का समर्थन किया है। उन्होंने इसे शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के लिए फायदेमंद बताया।
तीन भाषा नीति और हिंदी का प्रभाव
भारत में 1968 से तीन भाषा नीति लागू है, जिसके तहत छात्रों को स्थानीय भाषा, राष्ट्रीय भाषा और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा पढ़ाई जाती है। लेकिन 2020 में इस नीति को संशोधित कर नई शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू की गई, जिसमें किसी भाषा को अनिवार्य नहीं किया गया। हालांकि, स्टालिन ने लगातार हिंदी थोपने का विरोध किया है।
हिंदी से भारतीय भाषाओं पर खतरा
स्टालिन ने आरोप लगाया कि हिंदी थोपने के कारण पिछले 100 वर्षों में 25 उत्तर भारतीय भाषाएं खत्म हो गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भोजपुरी, मैथिली, बुंदेली, और अन्य कई भाषाओं के अस्तित्व पर खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी एक मुखौटा है और इसके पीछे संस्कृत छुपा हुआ है।
निष्कर्ष
तमिलनाडु सरकार का यह कदम हिंदी भाषा के बढ़ते प्रभाव और केंद्र की तीन भाषा नीति के खिलाफ विरोध का हिस्सा है। इस बिल के जरिए राज्य की संस्कृति और भाषा की रक्षा करने का प्रयास किया जा रहा है।