हाईकोर्ट का आदेश: भोपाल की जहरीली राख नहीं जाएगी पीथमपुर

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हाईकोर्ट  का आदेश: भोपाल की  जहरीली राख  नहीं जाएगी पीथमपुर

पीथमपुर में नहीं होगी भोपाल की जहरीली राख: हाईकोर्ट का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की जहरीली राख के सुरक्षित निष्पादन को लेकर एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 899 टन जहरीली राख का निष्पादन पीथमपुर में न किया जाए। कोर्ट ने कहा कि राख को ऐसे स्थल पर ले जाया जाए जहां मानव बस्ती, जलस्रोत और पेड़-पौधों पर कोई खतरा न हो।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सलाह लेने की बात

यह दूसरी बार है जब हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से वैकल्पिक स्थल की रिपोर्ट पेश करने को कहा है और साथ ही इस कार्य में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेने पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि राख रखने का ढांचा किसी प्राकृतिक आपदा के कारण टूट गया तो यह एक और बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।

भोपाल गैस त्रासदी की यादें ताजा

यूनियन कार्बाइड की भोपाल स्थित फैक्ट्री में 40 साल से 358 टन जहरीला कचरा जमा था। इसे जनवरी 2025 में पीथमपुर की रामकी एनवायरो कंपनी में भेजा गया, जहां इसे जलाकर 899 टन राख बनाई गई। कोर्ट ने पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इसे सुरक्षित तरीके से निपटाने के निर्देश दिए हैं।

संतुष्टि का अभाव

सरकार ने राख को सुरक्षित रखने के लिए एक एनिमेटेड वीडियो कोर्ट में प्रस्तुत किया था, लेकिन हाईकोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री को पहले सुरक्षित माना जाता था, लेकिन 1984 की गैस त्रासदी ने सबकुछ बदल दिया। अब किसी भी सावधानी को अत्यधिक नहीं माना जा सकता।

स्थानीय विरोध

भोपाल में जहरीले कचरे को जलाने का स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ था। कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई थी और दो युवकों ने अपने आप को जलाने की कोशिश भी की थी।

निष्कर्ष

हाईकोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि भोपाल की जहरीली राख को सुरक्षित और दूरस्थ स्थान पर निष्पादित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इस कार्य में अत्यधिक सतर्कता और विशेषज्ञों की मदद लेना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई त्रासदी न हो।