टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस में भीषण आग, 1 यात्री की मौत

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टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस में भीषण आग, 1 यात्री की मौत

आंध्र प्रदेश में टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस में आग, एक की मौत

आंध्र प्रदेश के येलमंचिली रेलवे स्टेशन पर टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो एसी कोच में अचानक आग लग गई। हादसे में 70 वर्षीय यात्री की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आई। घटना के बाद रेलवे और पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

येलमंचिली स्टेशन पर दो एसी कोच में आग

पुलिस के अनुसार, रविवार रात करीब 12:45 बजे ट्रेन में आग लगने की सूचना मिली। उस समय ट्रेन आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले में स्थित येलमंचिली रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी थी। आग पहले बी1 कोच में लगी और उसके बाद एम2 कोच तक फैल गई। दोनों एसी कोच में कुल मिलाकर डेढ़ सौ से ज्यादा यात्री सवार थे।

जब कोच से धुआं और लपटें उठती दिखीं तो घबराए यात्रियों ने इमरजेंसी चेन खींचकर ट्रेन रुकवाई और तुरंत बाहर की ओर भागे। देखते ही देखते दोनों कोच बुरी तरह जल गए, जिनमें यात्रियों का काफी सामान भी खाक हो गया।

एक यात्री की मौत, जले कोच ट्रेन से अलग किए गए

राहत और बचाव कार्य के दौरान बी1 कोच से एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान 70 वर्षीय चंद्रशेखर सुंदरम के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बाकी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, हालांकि उनके सामान को भारी नुकसान पहुंचा है।

घटना के बाद जले हुए दोनों कोचों को ट्रेन से अलग कर दिया गया और बाकी डिब्बों को एर्नाकुलम के लिए रवाना कर दिया गया। जिन यात्रियों की यात्रा बाधित हुई है, उन्हें आगे के गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अन्य साधनों की व्यवस्था की जा रही है।

आग लगने के संभावित तकनीकी कारणों पर जांच

इस हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि एसी कोच में आग कैसे लगी। आम तौर पर ट्रेन के अंदर लगाए जाने वाले पावर सॉकेट केवल 15 से 20 वॉट के लोड के लिए बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल या लैपटॉप जैसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने के लिए किया जाता है। इन सॉकेट में 110 वोल्ट एसी करंट होता है, जो घरेलू 220 से 240 वोल्ट की तुलना में कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सॉकेट पर अत्यधिक लोड डालने या गलत तरीके से भारी उपकरण चलाने से शॉर्ट सर्किट की स्थिति बन सकती है, जिससे तारों या पैनल में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न केवल लाइट और पंखों, बल्कि एसी सिस्टम की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है और पूरी बोगी में आग फैलने का जोखिम रहता है।

इसी संदर्भ में हाल ही में एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला यात्री एसी कोच में इलेक्ट्रिक केतली से नूडल्स और चाय बनाती दिखी थी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताते हुए इसका विरोध किया और रेलवे से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

हाल के महीनों में ट्रेन में आग की अन्य घटनाएं

पिछले कुछ महीनों में देश में कई बार ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में पंजाब के सरहिंद स्टेशन के पास अमृतसर से सहरसा जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस की एक एसी बोगी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। उस घटना में भी यात्रियों ने तुरंत चेन खींचकर ट्रेन रुकवाई और अपना सामान छोड़कर नीचे उतर गए थे।

नवंबर 2025 में मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर रीवा-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस के इंजन से धुआं उठने और आग लगने की घटना सामने आई थी। सुबह के समय हुई इस घटना के कारण यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई थी।

निष्कर्ष: सतर्कता और सुरक्षित उपयोग की जरूरत

येलमंचिली में टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के एसी कोच में लगी आग एक बार फिर याद दिलाती है कि ट्रेन यात्रा के दौरान जरा सी लापरवाही भी बड़ा हादसा बन सकती है। जहां एक ओर रेलवे को विद्युत और सुरक्षा प्रणालियों की नियमित जांच को और सख्त करना होगा, वहीं यात्रियों को भी कोच के सॉकेट पर ओवरलोडिंग, इलेक्ट्रिक केतली जैसे उपकरणों का इस्तेमाल और अनधिकृत विद्युत उपयोग से बचना होगा। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद आग के वास्तविक कारण साफ होंगे, लेकिन फिलहाल यह हादसा रेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और भविष्य के लिए चेतावनी भी देता है।

Ravi Yadav